एशियन गेम्स में कांस्य जीत उदयपुर पहुंचीं माहेश्वरी
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एशियन गेम्स 2026 में महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर निशानेबाज माहेश्वरी चौहान उदयपुर पहुंचीं। माहेश्वरी की सफलता में परिवार का बड़ा योगदान रहा, पिता ने बेटी की प्रतिभा को निखारने के लिए गांव में ही शूटिंग रेंज बनवाई।
उदयपुर, 7 अक्टूबर। एशियन गेम्स 2026 में महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली निशानेबाज माहेश्वरी चौहान के उदयपुर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। फतहसागर स्थित राज बाग में राजसमंद राइफल एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में खेल प्रेमियों और खेल जगत से जुड़ी हस्तियों ने माहेश्वरी का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। तालियों की गड़गड़ाहट और फूलों की बारिश के बीच माहेश्वरी का सम्मान किया गया।
उदयपुर पहुंचने से पहले दिल्ली और डबोक एयरपोर्ट पर भी उनका तिलक लगाकर स्वागत किया गया। सम्मान समारोह में वक्ताओं ने माहेश्वरी की उपलब्धि को उनकी कड़ी मेहनत, संघर्ष और परिवार के अटूट विश्वास का परिणाम बताया। छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा करने वाली माहेश्वरी की सफलता ने राजस्थान के खेल प्रेमियों को भी गौरवान्वित किया है।
आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स की महिला स्कीट टीम स्पर्धा में माहेश्वरी चौहान, राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल की भारतीय टीम ने कुल 331 अंकों के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा में चीन ने स्वर्ण और कजाकिस्तान ने रजत पदक हासिल किया।
माहेश्वरी की निशानेबाजी की शुरुआत परिवार से ही हुई। उन्होंने जालौर में अपने दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह से निशानेबाजी की शुरुआती बारीकियां सीखीं। बेटी की प्रतिभा और खेल के प्रति लगन को देखते हुए पिता ने सियाणा गांव में ही शूटिंग रेंज तैयार करवाई, ताकि माहेश्वरी को अभ्यास के लिए बेहतर सुविधा मिल सके।
शादी के बाद भी माहेश्वरी ने निशानेबाजी का अभ्यास जारी रखा और केलवा स्थित राजसमंद राइफल शूटिंग संघ की रेंज में प्रशिक्षण लिया। 4 जुलाई 1996 को सियाणा में जन्मीं माहेश्वरी ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई की है।
माहेश्वरी चौहान की यह उपलब्धि न सिर्फ उनकी मेहनत और प्रतिभा की कहानी है, बल्कि यह भी बताती है कि परिवार का सहयोग और सही सुविधाएं मिलें तो छोटे गांवों से निकलकर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।