Explained: 4F क्राइसिस क्या है और आपको डरने की जरूरत है या नहीं? एक्सपर्ट्स से जानें सच
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विदेश मंत्री एस.
जयशंकर ने सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान '4F क्राइसिस' की चेतावनी दी थी. 4F यानी फूड (भोजन), फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फाइनेंस (वित्त).
यह कोई नई बीमारी नहीं, बल्कि ऐसी चेन है जिसमें एक चीज महंगी होती है तो दूसरी भी महंगी हो जाती है. आखिर में आम आदमी की जेब पर असर पड़ता है. इससे डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है.
भारत पूरी तरह संकट में नहीं है, लेकिन हवा का रुख गंभीर है. तो 4F के बारे में जानते हैं और यह कैसे आपको कंगाल कर सकती है...
4F की चेन कैसे काम करती है?
कहीं भी युद्ध या तनाव होता है, तो तेल और गैस की सप्लाई बाधित होती है. तेल-गैस महंगी होती है.
उर्वरक बनाने में गैस लगती है, इसलिए उर्वरक भी महंगा होता है. उर्वरक महंगा होने से खेती की लागत बढ़ती है. खेती महंगी होने से अनाज महंगा होता है.
जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित जगहों पर पैसा भेजते हैं. इससे विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है. यानी एक ही चिंगारी चार जगह आग लगा देती है.
भारत की हालत क्या है?
खाना (Food): भारत में अगस्त 2026 तक खाद्य महंगाई 5.95% पर थी.
प्याज अगस्त में 43% महंगा हो गया. टमाटर जुलाई में 31.92% तक उछला था. मानसून ने इस साल 10% कम बारिश दी है और अल नीनो की स्थिति बन रही है.
सरकार ने 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373 मिलियन टन कर दिया है, जो पिछले साल से 2.63 मिलियन टन कम है.
राहत की बात है कि सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 28 मई 2026 तक 513 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 1 जुलाई के लिए जरूरी बफर स्टॉक सिर्फ 275.80 लाख मीट्रिक टन है. यानी भंडार जरूरत से लगभग दोगुना है.
ईंधन (Fuel): भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल और 50% गैस आयात करता है. अप्रैल 2026 में ईंधन और बिजली की कीमतें सालाना आधार पर 24.71% बढ़ गई थीं.
भारत का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व सिर्फ 5.33 मिलियन मीट्
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar