राजनीति

Explained: क्या भारतीय मुसलमानों की लीडरशिप कमजोर पड़ी? AIMPLB से ओवैसी तक उठ रहे सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
Explained: क्या भारतीय मुसलमानों की लीडरशिप कमजोर पड़ी? AIMPLB से ओवैसी तक उठ रहे सवाल

दिल्ली पुलिस ने 17 सितंबर 2026 को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के जंतर-मंतर धरने की अनुमति आखिरी वक्त पर रद्द कर दी.

ठीक 12 दिन बाद 29 सितंबर को जब मॉनिटरिंग कमेटी ऑफ इंडियन मुस्लिम्स (MCIM) ने वही जंतर-मंतर प्रदर्शन करने की कोशिश की, तो पुलिस ने बड़े नेताओं समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया.

दो बार तारीख तय हुई और दोनों बार जंतर-मंतर का मंच नहीं मिला.

इसके बाद सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से उठने लगा- क्या मुस्लिम लीडरशिप कमजोर पड़ती जा रही है?

AIMPLB ने 'संविधान बचाओ-शरिया बचाओ' अभियान की शुरुआत जंतर-मंतर धरने से करनी थी.

बोर्ड का कहना था कि उसने पुलिस को तीन बार भरोसा दिलाया कि भीड़ तय सीमा में रहेगी. फिर भी कार्यक्रम से एक दिन पहले अनुमति वापस ले ली गई.

AIMPLB के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, प्रवक्ता डॉ.

सैयद कासिम रसूल इलियास और महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नाराजगी जताई, लेकिन जंतर-मंतर पर धरना नहीं हो सका.

अभियान प्रेस क्लब से शुरू हुआ और बोर्ड ने लोगों से दिल्ली न आने की अपील कर दी.

29 सितंबर को दूसरी कोशिश, लेकिन वही नतीजा

MCIM ने 29 सितंबर 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया.

PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने खुद वीडियो अपील जारी कर 'धर्मनिरपेक्ष' लोगों से जुड़ने की गुहार लगाई.

वोटर लिस्ट से मुस्लिम नाम हटाना, मस्जिदों और दरगाहों पर बुलडोजर कार्रवाई और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना मुद्दे थे.

जंतर-मंतर पहुंचते ही पुलिस ने MCIM के सदस्यों और विपक्षी मुस्लिम सांसदों को हिरासत में ले लिया.

सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा, 'हम आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे.' नतीजन, प्रदर्शन हो नहीं पाया.

AIMPLB की नाकामी या सिर्फ अनुमति का मामला?

मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, AIMPLB के 17 सितंबर के फ्लॉप होने की असली वजह सिर्फ पुलिस की अनुमति नहीं, बल्कि 'बोर्ड की

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और मॉनिटरिंग कमेटी ऑफ इंडियन मुस्लिम्स (MCIM) द्वारा जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर आधारित है। यह विषय भारतीय मुसलमानों की राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व की कमजोरी पर सवाल उठाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि पुलिस ने दो बार प्रदर्शन के मंच को रोक दिया, जिससे मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों की आवाज़ दबाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और मुसलमानों के बीच राजनीतिक जागरूकता

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