Explained: SIP के 'साइलेंट नुकसान' क्या हैं? निवेश के पहले एक्सपर्ट्स से 5 उपाय जान लें
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सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) यानी हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में डालना. इसे 'सबसे आसान और सुरक्षित निवेश' बताया जाता है. सच यह है कि SIP कोई जादू की छड़ी नहीं है.
बीते ढाई साल में विदेशी निवेशकों ने भारत से करीब 4.7 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं. यह पैसा जिसने खरीदा, वह कोई और नहीं, आपका और मेरा SIP था. इसका मतलब यह नहीं कि SIP बंद कर दो.
मतलब यह है कि SIP के कुछ नुकसान हैं, जिन्हें जानना जरूरी है.
एक्सप्लेनर में फाइनेंशियल एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अमित केडिया से SIP के 5 बड़े नुकसान और उपाय जानेंगे...
नुकसान- 1: SIP सिर्फ 'कब खरीदें' का रिस्क
SIP का सबसे बड़ा फायदा बताया जाता है- 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग.' यानी महीने-महीने पैसा डालोगे, तो कभी महंगा खरीदोगे, कभी सस्ता और औसत ठीक रहेगा.
यह सिर्फ 'कब खरीदें' का रिस्क कम करता है.
अगर आपने ऐसा फंड चुना है जिसके शेयर पहले से बहुत महंगे हैं, तो SIP आपको नहीं बचा सकता.
उदाहरण: किसी ने टेक्नोलॉजी फंड के पीक पर SIP शुरू किया और 5 साल चलाया. 6 लाख रुपए डाले, लेकिन रिटर्न मिला -0.67% सालाना. यानी पैसा घट गया.
SIP ने खरीदारी फैला दी, लेकिन महंगे फंड में फंसे पैसे को नहीं बचाया.
अगर आपने 2-3 टेक्नोलॉजी फंड या 2-3 PSU फंड में SIP चला रखा है, तो आपको लगता है कि 'डायवर्सिफिकेशन हो गया.' असल में आपका पूरा पैसा एक ही सेक्टर के खतरे में है.
एक सेक्टर गिरा तो सब गिरे.
नुकसान- 2: विदेशी बेचते हैं, आपका SIP खरीदता है
विदेशी निवेशक (FII) बहुत ज्यादा शेयर बेचते हैं, तो उन्हें खरीदने वाला चाहिए.
वह खरीदार घरेलू म्यूचुअल फंड होते हैं, जिनके पास हर महीने SIP से 30,000-32,000 करोड़ रुपए आ रहा है.
इसका मतलब आपका SIP इसलिए बाजार में जा रहा है क्योंकि विदेशी बेच रहे हैं.
यह मजबूरी ह
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar