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फरक्का जल संधि के नवीकरण को लेकर जदयू का जागरूकता अभियान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
फरक्का जल संधि के नवीकरण को लेकर जदयू का जागरूकता अभियान

मुंगेर में जदयू ने फरक्का जल संधि के नवीकरण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। संजय झा और उमेश कुशवाहा ने बिहार के जलहितों की रक्षा की मांग उठाई।

02 नवंबर, मुंगेर (मुंगेर, बिहार) : फरक्का जल संधि के नवीकरण को लेकर बिहार के हितों और जल आवश्यकताओं के मुद्दे पर जदयू की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को मुंगेर के नगर भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वर्ष 1996 में बांग्लादेश के साथ हुई फरक्का जल संधि से बिहार को काफी नुकसान हुआ है। संधि के नवीकरण के समय बिहार की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए। खेती, उद्योग और बढ़ती आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। बिहार के हितों से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मांग को केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया है और वहां से सकारात्मक आश्वासन मिला है। यह बिहार के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने का उचित समय है। उन्होंने राजद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वर्ष 1996 में ऐसी संधि होने पर उसने आपत्ति क्यों नहीं जताई। संजय झा ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार में सहयोगी जरूर है, लेकिन उसकी अपनी अलग राजनीतिक पहचान और विचारधारा है। जदयू का स्पष्ट रुख है कि फरक्का जल संधि के नवीकरण में बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

वहीं, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फरक्का जल संधि से जुड़े मुद्दे को नीतीश कुमार की सोच के अनुरूप राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस जागरूकता अभियान का पहला चरण सितंबर महीने में शुरू हुआ था, जिसके तहत चार जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। दूसरे चरण में भी चार जिलों में अभियान चलाया गया। अब अंतिम चरण की शुरुआत लखीसराय से की गई है और मुंगेर इस अभियान का दसवां पड़ाव है। अंतिम चरण में कुल 12 जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसका समापन कटिहार जिले में होगा।

उमेश कुशवाहा ने कहा कि गंगा बिहार में बक्सर के रास्ते प्रवेश करती है और राज्य के 12 जिलों से गुजरते हुए आगे बांग्लादेश की ओर जाती है। इन जिलों के लोग हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलते हैं। उन्होंने दावा किया कि फरक्का जल संधि के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी की जलधारण क्षमता कम हुई है, जिससे बाढ़ की समस्या गंभीर होती है।

उन्होंने कहा कि बिहार को जब सिंचाई और रोजगार के लिए पानी की जरूरत होती है, उस समय पानी की उपलब्धता को लेकर परेशानी होती है। उनके अनुसार, केवल गंगा ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी अन्य नदियों के जल बंटवारे का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि बिहार का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा सूखे की समस्या से प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि यह संधि न तो देश के हित में है और न ही बिहार के हित में।

कार्यक्रम के माध्यम से जदयू नेताओं ने फरक्का जल संधि के नवीकरण में बिहार की जल जरूरतों, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देने की मांग उठाई।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।