फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए UK के नागरिकों से ठगे 7 करोड़ रुपये, ED ने कुर्क की संपत्ति
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प्रवर्तन निदेशालय (ED)के प्रयागराज जोनल ऑफिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है.
ED ने 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002' के प्रावधानों के तहत एक 'कुर्की आदेश' (PAO) जारी करके इन चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है.
इसमें कोलकाता में एक प्लॉट और फ्लैट, बैंक बैलेंस और बीमा पॉलिसियां शामिल हैं.
मुख्य आरोपी अनिक दत्ता और अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कॉल सेंटरों और हवाला नेटवर्क के जरिए यूके के नागरिकों को ठगकर 7 करोड़ रुपये जुटाए थे.
ED ने यह जांच उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज FIR और दायर चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी.
यह मामला अनिक दत्ता, आकाश गुप्ता, आदित्य मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ IPC, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज अपराधों से जुड़ा है.
जांच में पता चला है कि अनिक दत्ता, आकाश गुप्ता और आदित्य कुमार मिश्रा समेत अन्य आरोपियों ने 'M/s ग्लोबर्ड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड, रांची' और बाद में 'M/s जुबिलेट इंफो प्राइवेट लिमिटेड, गोरखपुर' के जरिए फर्जी कॉल सेंटर चलाए.
ED ने अपनी जांच में पाया कि इंटरनेट स्पीड सुधारने के बहाने ये आरोपी पीड़ितों को 'एनीडेस्क' (AnyDesk) और 'क्विक असिस्ट' (Quick Assist) जैसे 'रिमोट एक्सेस' सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए राजी कर लेते थे.
ED का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी कॉल सेंटर चलाकर UK के बुजुर्गों से साइबर ठगी की थी.
ED की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी 'एनीडेस्क' (AnyDesk) और 'क्विक असिस्ट' (Quick Assist) के जरिए पीड़ितों के डिवाइस व बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बना रहे थे.
ठगी की रकम Western Union, MoneyGram और अन्य हवाला चैनलों से भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड भेजी जा रही थी.
ED ने इस जांच में करीब ₹7 करोड़ की रकम अवैध तरीके से जुटाए जाने का अनुमान लगाया है.
कार्रवाई करते हुए ED ने इन आरोपियों से कोलकाता का प्लॉट-फ्लैट, बैंक बैलेंस और बीमा पॉलिसियां आदि कुर्क किए है.
📡 स्रोत: ABP Live