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गद्दारी करने वाले बांग्लादेश के लिए भारत ने दबाया बिजली का बटन, ढाका में हाहाकार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
गद्दारी करने वाले बांग्लादेश के लिए भारत ने दबाया बिजली का बटन, ढाका में हाहाकार

उधर ढाका के सत्ता के गलियारों में बैठकर भारत के साथ हुए 101 समझौतों को फाड़कर रद्दी की टोकरी में फेंकने की कसमें खाई जा रही थी और इधर अचानक दिल्ली की तरफ से एक ऐसा साइलेंट बटन दबा कि पूरे बांग्लादेश में सन्नाटा पसर गया और बत्ती गुल हो गई। धमकी दिए अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि 1600 मेगावाट का अडानी पावर प्लांट अचानक से आधा हो गया।

ढाका से लेकर चटकांव तक फैक्ट्रियों के सायरन खामोश हो गए और भारत को आंखें दिखाने वालों के पसीने छूट गए। जिस पाकिस्तान ने 1971 में बांग्लादेश की जमीन पर 30 लाख मासूमों का खून बहाया था। आज उसी दिवालिया मुल्क के साथ मिलकर भारत खिलाफ बंद कमरों में क्या खिचड़ी पक रही है और कोलकाता एयरपोर्ट से लेकर पावर ग्रिड तक भारत ने अचानक बांग्लादेश की आर्थिक सांसों पर शिकंजा क्यों कस दिया है?

बांग्लादेश के जूनियर विदेश मंत्री मंच पर खड़े होकर बड़े घमंड से कहते हैं कि बांग्लादेश अब भारत की बात नहीं मानेगा और भारत उनके लिए दुनिया के किसी भी आम देश जैसा है। लेकिन इस बयान को आए अभी ठीक से 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि झारखंड में मौजूद अडानी पावर के 1600 मेगावाट कैपेसिटी वाले गोड्डा अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट की 800 मेगावाट की एक पूरी यूनिट अचानक से ट्रिप कर जाती है।

इसे भी पढ़ें: एक नहीं, दिए गए थे दो निमंत्रण, तारिक़ रहमान की भारत यात्रा को लेकर MEA ने बांग्लादेश को दिया दो टूक जवाब बांग्लादेश को जो बिजली की सप्लाई 1400 मेगावाट से ऊपर मिल रही थी वह देखते ही देखते गिरकर 750 मेगावाट के नीचे आ गई है। पूरे बांग्लादेश के अंदर 136 पावर प्लांट होने के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने और गैस कोयले की भयंकर कमी के कारण वे खुद की बिजली नहीं बना पा रहे हैं।

जैसे ही भारत की तरफ से बिजली आदि हुई, नेशनल ग्रीड पूरी तरह से चरमरा गया,भारत सरकार और अडानी पावर ने कोई भड़काऊ बयान नहीं दिया। बस शांत रहकर इतना कहा कि मरम्मत में 48 घंटे या कुछ दिन लग सकते हैं। लेकिन कूटनीति की दुनिया में यह सन्नाटा ही सबसे बड़ा जवाब होता है। भारत ने बिना एक गोली चलाए ढाका को यह साफ संदेश दे दिया कि तुम्हारी अर्थव्यवस्था का मेन स्विच कहां लगा हुआ है?

अब अगला सवाल यह उठता है कि भारत को इतना सख्त रवैया क्यों अपनाना पड़ा बांग्लादेश के साथ?

तो दोस्तों इसकी जड़ में है बांग्लादेश की नई सरकार का वो अहंकार जो सीधे भारत की संप्रभुता और नॉर्थ ईस्ट की सुरक्षा को चुनौती दे रहा था। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मानी ने खुले मन से ऐलान कर दिया कि पिछली सरकार के दौरान भारत के साथ साइन हुए 101 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू की समीक्षा की जा रही है और इन्हें बहुत जल्द ही रद्द कर दिया जाएगा और इसमें सबसे बड़ा और खतरनाक निशाना कौन सा है?

चटगांव पोर्ट। इसे भी पढ़ें: Bangladesh और China के बीच नए Economic Corridor पर चर्चा, म्यांमार के रास्ते कनेक्टिविटी की तैयारी वैसे हम सभी जानते हैं कि भारत को असम, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक जाने के लिए 1600 कि.मी.

लंबे और बेहद पतले सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक से होकर गुजरना पड़ता है। जहां चीन की भी गिद्ध जैसी नजरें लगी रहती हैं। भारत ने बड़ी समझदारी और कूटनीति से चटगांव पोर्ट के इस्तेमाल का स्थाई समझौता किया था। जिससे समुद्र के रास्ते हमारा माल सीधे चटगांव और वहां से कुछ ही घंटों में नॉर्थ ईस्ट पहुंच जाता था।

लेकिन अब बांग्लादेश की नई हुकूमत इस रणनीतिक समझौते को तोड़ने और भारतीय जहाजों को बाहर करने की धमकी दे रही है। शायद ढाका के नए आका ये भूल गए हैं कि जिस देश की सेना ने उन्हें कभी दुनिया के नक्शे पर पहचान दिलाई थी वो अपने रणनीतिक हितों से 1 इंच भी पीछे नहीं हटने वाला है। बांग्लादेश का रणनीतिक अंधापन सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।

जिस पाकिस्तान की सेना ने ऑपरेशन सच के तहत लाखों मासूम बांग्लादेशियों पर जुल्म ढाए थे। आज ढाका की सत्ता उसी पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ साजिशें बुन रहे हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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