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गांव बेचना है, कीमत- पानी:तुलशी गांव के 350 लड़कों की शादी तक नहीं हो रही; महाराष्ट्र की 265 तहसीलें सूखा घोषित

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
गांव बेचना है, कीमत- पानी:तुलशी गांव के 350 लड़कों की शादी तक नहीं हो रही; महाराष्ट्र की 265 तहसीलें सूखा घोषित

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलशी गांव में पानी की कमी से परेशान लोग गांव बेचने जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एक बोर्ड भी लगाया है। हालांकि गांव की कीमत सिर्फ पानी रखी गई है। बोर्ड में यह भी लिखा है कि आखिर अन्याय कब तक सहन करें। माढा तहसील के इस गांव की 7000 आबादी कई सालों से पानी की समस्या से जूझ रही है।

गांव के खेत और कुएं सूख चुके हैं। लोगों को पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गांव के सरपंच ने यह भी दावा किया है कि जल संकट के कारण गांव के करीब 350 युवकों की शादी नहीं हो पा रही है। राज्य सरकार ने 26 सितंबर को राज्य की 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है। साथ ही राहत पैकेज की घोषणा भी की है।

26 साल से अधूरा खुदाई का काम तुलशी के सरपंच शरद मोरे ने कहा, “गांव में हर साल पानी की कमी रहती है। “गांव बिक्री के लिए, कीमत-पानी” का बोर्ड लगाकर सरकार का ध्यान समस्या की ओर खींचने की कोशिश की गई है। मोरे ने पहले बताया था कि सीना-माढा योजना के 7वें और 8वें आउटलेट के पास करीब 800 मीटर खुदाई का काम 26 साल से अधूरा है।

यह काम पूरा होने पर तुलशी की पानी की समस्या हमेशा के लिए दूर हो सकती है। पानी पहुंचाने के लिए मंजूर हुए थे 90 लाख रुपए 2024 में कृष्णा घाटी विकास निगम ने तुलशी समेत सूखाग्रस्त गांवों में सीना-माढा योजना से पानी पहुंचाने की मंजूरी दी थी। इस साल जनवरी में तुलशी के भवानी परकोलेशन टैंक तक बंद पाइपलाइन से पानी पहुंचाने के लिए 2025-26 में 90 लाख रुपए मंजूर किए जाने की घोषणा भी हुई थी।

इससे गांव की पेयजल और सिंचाई की समस्या दूर होने की उम्मीद थी। हालांकि मोरे का कहना है कि उन्हें डीपीडीसी से बंद पाइपलाइन के लिए कुछ राशि मंजूर होने की जानकारी मिली है, लेकिन जमीन पर अभी तक ठोस काम शुरू नहीं हुआ है। जल जीवन मिशन भी बेअसर, 14 कुएं-तालाब सूखे ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत काम कराया गया है।

लेकिन स्थानीय जलस्रोत सूख जाने से यह योजना काम की नहीं रही। तुलशी में 14 तालाब और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें भरने से पीने और सिंचाई के पानी की कमी काफी कम हो सकती है। तुलशी के ज्यादातर लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं। पानी के संकट ने उनकी आजीविका पर बुरा असर डाला है।

जल संकट का असर लोगों की निजी जिंदगी पर भी पड़ा है। गांव के

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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