गांव का चायवाला बना पर्यावरण योद्धा
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पाली के बीसलपुर में कानाराम मेवाड़ा ने चाय की दुकान से शुरू कर प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर फर्नीचर बनाने की यूनिट खड़ी कर दी। ‘प्लास्टिक लाओ-पर्यावरण बचाओ’ मुहिम से 25 गांव जुड़े, अब तक 10 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा जुटाया गया।
पाली, 5 अक्टूबर। पर्यावरण संरक्षण के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और जनभागीदारी किस तरह बदलाव ला सकती है, इसकी प्रेरणादायक मिसाल पाली जिले के बीसलपुर गांव में देखने को मिल रही है। यहां 35 वर्षीय कानाराम मेवाड़ा ने प्लास्टिक कचरे को समस्या मानकर छोड़ने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन में बदलने की पहल शुरू की है।
जवाई लेपर्ड एरिया के पास स्थित बीसलपुर गांव में कभी चाय की दुकान चलाने वाले कानाराम ने जवाई क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों द्वारा जगह-जगह फेंके जा रहे प्लास्टिक कचरे को देखा। इससे चिंतित होकर उन्होंने वर्ष 2020 में ‘प्लास्टिक लाओ-पर्यावरण बचाओ’ अभियान शुरू किया। बच्चों को प्लास्टिक कचरा लाने के बदले शक्कर, कॉपी-पेंसिल और जरूरतमंद लोगों को 20 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी गई। धीरे-धीरे अभियान का दायरा बढ़ा और करीब 25 गांव इससे जुड़ गए।
पिछले करीब पांच वर्षों में कानाराम और उनकी टीम ने 10 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा एकत्र किया। इसके बाद उन्होंने प्लास्टिक को उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया। डीजेईडी फाउंडेशन की मदद से फरवरी 2024 में मशीन खरीदी गई और जनवरी 2025 में बीसलपुर में प्लास्टिक रिसाइक्लिंग यूनिट शुरू हुई।
यूनिट में प्लास्टिक को प्रोसेस कर लकड़ी जैसी ‘लंबर’ तैयार की जाती है। इससे डस्टबिन, कुर्सियां, बेंच सहित कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। कानाराम के अनुसार, प्लास्टिक से तैयार इन फर्नीचर उत्पादों की उम्र करीब 100 वर्ष तक हो सकती है। अब सरकारी विभाग भी उनके उत्पादों में रुचि दिखा रहे हैं और हाल ही में जवाई बांध रेलवे स्टेशन के लिए बेंच का ऑर्डर भी मिला है।
कानाराम का कहना है कि उनकी मुहिम सिर्फ अपने गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पर्यावरण को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उनका संदेश है कि यदि हर गांव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छोटा सा कदम उठाए, तो बड़े स्तर पर बदलाव संभव है।
बीसलपुर के साथ बलवना, वरावल, दूदनी, भाटूंद, बेड़ा और जीवदा सहित कई गांव इस अभियान से जुड़ चुके हैं। अब ग्रामीण स्वयं प्लास्टिक कचरा लेकर कानाराम की यूनिट तक पहुंचा रहे हैं।
बीसलपुर से शुरू हुई यह पहल अब कचरे को संसाधन और समस्या को रोजगार के अवसर में बदलने की मिसाल बन रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ता यह कदम बताता है कि सामूहिक भागीदारी से प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।
बाईट - कानाराम मेवाड़ा
बाईट - दिनेश ग्रामवासी
बाईट - रमेश कचरा संग्रहकर्ता
पीटूसी