गौतम गंभीर की छुट्टी, एशियन गेम्स के लिए लक्ष्मण क्यों बने टीम इंडिया के कोच?
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 04 अक्टूबर के बीच होने वाले 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय दल का एलान हो चुका है.
मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स ने गुरुवार (03 सितंबर) को 768 सदस्यीय भारतीय दल की घोषणा की, जिसमें पुरुष भारतीय क्रिकेट टीम के कोच के रूप में वीवीएस लक्ष्मण का नाम शामिल रहा.
गौतम गंभीर पुरुष टीम के मुख्य हेड कोच हैं.
ऐसे में फैंस के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर गंभीर की जगह लक्ष्मण को यह जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई.
दरअसल, सितंबर और अक्टूबर में वेस्टइंडीज टीम व्हाइट बॉल सीरीज के लिए भारत का दौरा करेगी.
यह सीरीज कहीं न कहीं एशियन गेम्स से टकराएगी, जिसके चलते जापान के लिए गंभीर की जगह लक्ष्मण को हेड कोच बनाया गया. गंभीर की कोचिंग वाला कोचिंग स्टाफ वेस्टइंडीज सीरीज में व्यस्त होगा.
बता दें कि लक्ष्मण के साथ एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष टीम के कोचिंग स्टाफ में ऋषिकेश कानिटकर, सुनील जोशी और सुभादीप घोष शामिल होंगे.
सुभादीप को हाल ही में पुरुष टीम का फील्डिंग कोच बनाया गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा नहीं होंगे.
यह भी पढ़ें: 44 की उम्र में जेम्स एंडरसन का कहर, बोल्ड कर लिया 1183वां विकेट
जापान में जहां पुरुष क्रिकेट टीम के साथ रेगुलर सपोर्ट स्टाफ नहीं होगा, वहीं महिला टीम रेगुलर स्टाफ के साथ जाएगी.
इन दिनों UAE में चल रहे एशिया कप के खत्म होने के बाद महिला टीम अपने रेगुलर कोचिंग स्टाफ के साथ जापान जाएगी.
इस स्टाफ में अमोल मजूमदार हेड कोच के रूप में, आविष्कार साल्वी बॉलिंग कोच के रूप में और मुनीश बाली फील्डिंग कोच के रूप में शामिल हैं.
इससे पहले भी हेड कोच थे लक्ष्मण
<p style="text-align: justify;"
📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
गौतम गंभीर की छुट्टी के बाद एशियन गेम्स के लिए टीम इंडिया के कोच के रूप में वीवीएस लक्ष्मण का नाम घोषित हुआ। यह विषय भारतीय खेल जगत में कोचिंग टीम के बदलाव को दर्शाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि लक्ष्मण की रणनीति और अनुभव से टीम के प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ेगा, और फैंस के बीच चर्चा बढ़ेगी। इससे भारतीय जनता को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस प्रकार कोचिंग में बदलाव से खिलाड़ियों का मनोबल और खेल रणनीति बदल सकती है, जिससे राष्ट्रीय गर्व और खेल के प्रति रुचि बढ़ सकती है।