'गिफ्तारी के नियम हटने का स्वागत', GST रिफॉर्म पर बोले PM मोदी- इससे बढ़ेगी पारदर्शिता
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए फैसले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारीफ की है.
इस बैठक के तहत GST टैक् स अधिकारियों के पास से गिरफ्तारी करने के अधिकार को समाप् त करने को मंजूरी दी गई. साथ ही अभियोजन सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
पीएम मोदी ने जीएसटी सुधारों के नए दौर का स्वागत करते हुए कहा कि ये तेज निर्णय प्रक्रिया, कम अनुपालन लागत पर केंद्रित हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'मैं GST काउंसिल द्वारा मंजूर किए गए GST सुधारों के नए दौर का स्वागत करता हूं.
गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने, नियमों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के बारे में काउंसिल की सिफारिशों का बहुत सकारात्मक असर होगा.
हमारा फोकस साफ है, तेजी से फैसले, कम अनुपालन लागत, ऑटोमेटेड रिफंड और भरोसे पर आधारित प्रशासन.
ये कदम GST को ज्यादा कुशल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने की हमारी लगातार कोशिशों के अनुरूप हैं.'
GST अफसर से गिरफ्तारी का अधिकार छीना
जीएसटी परिषद ने 57वीं बैठक में व्यापार में आसानी से उद्देश्य से कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति को खत्म कर दिया है.
साथ ही, मुकदमा चलाने की सीमा को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया है. यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से दी गई.
बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस वार्ता में कहा कि पिछले साल सरकार ने जीएसटी की दरों को कम किया था.
इस साल हमने प्रक्रिया को आसान बनाने पर फोकस किया है.सीतारमण ने कहा, 'रजिस्ट्रेशन में सामान्य बदलावों को अपने-आप अनुमति देने को मंजूरी जीएसटी परिषद ने दे दी है.
अब रिफंड तेजी से जारी होंगे और स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटकर 10 दिन हो जाएगी. साथ ही, 90 फीसदी रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
गिफ्तारी के नियम हटाने और अभियोजन सीमा बढ़ाने के निर्णय से GST सुधारों को तेज़ी से लागू करने का लक्ष्य है। यह कदम कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति को समाप्त कर, करदाता के अधिकारों को मजबूत करता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कर प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि करदाता पर अनावश्यक दबाव कम होगा, अनुपालन लागत घटेगी और व्यापारिक वातावरण में सुधार होगा।