गोमती के उफान में डूबा लेटे हनुमान मंदिर, लगा ताला:गर्भगृह में 20 साल बाद भरा 13 फीट पानी, 51 लीटर दूध से हुआ अभिषेक
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस चुका है। करीब 3 लाख लोग प्रभावित हैं। बढ़ते जलस्तर का असर गोमती तट के मंदिरों पर भी दिख रहा है। पातालपुरी लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह पानी में डूब गया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, हनुमान जी की प्रतिमा के ऊपर करीब 13 फीट पानी बह रहा है।
सुरक्षा को देखते हुए मंदिर का मुख्य हिस्सा यानी गर्भगृह बंद कर दिया गया है। मंदिर के पुजारी महंत विनोद तांगड़ी ने बताया कि भक्तों के दर्शन के लिए हनुमान जी की चरण पादुका बाहर रखी गई है। उन्होंने कहा कि गोमती नदी ने मंदिर को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया है। हनुमान जी को स्नान कराने के बाद अब उन्हें विश्राम अवस्था में रखा गया है।
महंत ने बताया कि 2006 के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। जलस्तर कम होने की कामना के लिए विशेष पूजा की गई। साथ ही 51 लीटर दूध से हनुमान जी का अभिषेक किया गया। 3 तस्वीरें देखिए… ‘जल भराव से 30 % आबादी प्रभावित’ मंदिर के पुजारी विनोद तांगड़ी ने बताया कि मानवीय दृष्टिकोण से यह बेहद दुखद स्थिति है।
लखनऊ की करीब 30% आबादी प्रभावित हुई है, खासकर डाउनस्ट्रीम इलाकों में रहने वाले लोग। फैजुल्लागंज और घैला समेत कई इलाके पूरी तरह डूब रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यह स्थिति कहीं न कहीं हमारी अपनी गलतियों का भी नतीजा है। हमने नदियों का सम्मान नहीं किया और प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया।
पेड़ काटते गए और प्रकृति के साथ संतुलन बिगड़ता गया। आज इसका असर हमारे सामने है। ‘गोमती में गिरने वाले नाले के रहे हैं दूषित’ सरकारी स्तर पर इस पर ध्यान देना चाहिए। लगभग 32 नाले हैं जो मां गोमती में सीधे गिर रहे हैं । तो माता भी अपने आप को स्वच्छ करने के लिए आज विशाल जल प्रवाह लेके आई हैं कि जिससे जितनी भी गंदगी है सब भाग जाए।
दुनिया कि गंदगी, प्लास्टिक , गंदगी सब नदी में मिलेगा । जो गोमती का अपमान किया है उसका दंश तो हम ही को झेलना पड़ेगा।
📡 स्रोत: NewsData.io