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ग्रीन दीवाली: खुशियों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
ग्रीन दीवाली: खुशियों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

नवंबर 07, नई दिल्ली: दीपावली रोशनी, उल्लास और उत्साह का पर्व है। देशभर में लोग इस त्योहार को पूजा-पाठ, खरीदारी, सजावट और आतिशबाजी के साथ मनाते हैं। हालांकि, त्योहार के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी चिंताएं बढ़ जाती हैं। खासकर उत्तर भारत के कई शहरों में पटाखों के धुएं और मौसमी परिस्थितियों के कारण वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। आतिशबाजी का शोर और धुआं बुजुर्गों, सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों और पशु-पक्षियों के लिए भी परेशानी का कारण बनता है।

ऐसे में पर्यावरण अनुकूल तरीके से दीपावली मनाने यानी ग्रीन दीवाली की पहल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य त्योहार की खुशियों को बरकरार रखते हुए पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है।

ग्रीन दीवाली मनाने के लिए लोग कई आसान उपाय अपना सकते हैं। बिजली की सजावटी लड़ियों के साथ पारंपरिक मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलता है। वहीं, सजावट के लिए प्लास्टिक की वस्तुओं के बजाय कपड़े, कागज और दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली सामग्री को प्राथमिकता दी जा सकती है। उपहारों की पैकेजिंग में जूट और कपड़े का इस्तेमाल करने से प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है। इसी तरह, रंगोली बनाने के लिए रासायनिक रंगों के बजाय फूलों, चावल और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा सकता है।

पटाखों से दूरी बनाना भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है। वहीं, आतिशबाजी के विकल्प के रूप में केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रमाणित ग्रीन पटाखों का सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है।

ग्रीन दीवाली को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से भी पहल की जा रही है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में 'मिशन LiFE' यानी 'लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट' के तहत देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से लोगों को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के जरिए भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

कुल मिलाकर, मिट्टी के दीयों के इस्तेमाल, प्राकृतिक सजावट, प्लास्टिक के कम उपयोग और पटाखों से दूरी जैसे छोटे-छोटे प्रयासों से दीपावली को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

ग्रीन दीवाली के तहत भारत में दीपावली के दौरान पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल लोगों को पारंपरिक पटाखों के बजाय पर्यावरण‑अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करती है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि दीपावली के दौरान होने वाले धुआँ और शोर से वायु गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ता है, विशेषकर उत्तर भारत में। यदि इस मुद्दे पर जनता की जागरूकता बढ़ती है तो धूम्रपान‑मुक्त पटाखे, कम शोर वाली आतिशबाजी और रीसाइक्लिंग जैसी प्रथाएँ अपनाई जा सकती हैं। इससे श्वसन रोगों में कमी, शोर‑प्रदूष

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।