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गुजरात में शराब बैन, फिर भी लोग गटक गए 60,000 लीटर दारू, सरकार का खुलासा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
गुजरात में शराब बैन, फिर भी लोग गटक गए 60,000 लीटर दारू, सरकार का खुलासा

गुजरात राज्य में शराब पर बैन लगा है, लेकिन फिर भी यहां का एक शहर ऐसा है जहां पर शराब की ताबड़तोड़ बिक्री हो रही है.

हम बात कर रहे हैं गुजरात की GIFT (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी) सिटी के बारे में, जहां पिछले एक सालों में शराब की बिक्री 15 गुना ज्यादा बढ़ गई है. हाल ही में इसे लेकर सरकार ने आंकड़े भी शेयर किए हैं.

दरअसल गुजरात की GIFT सिटी में शराब की बिक्री पिछले एक साल में तेजी से बढ़ी है.

राज्य सरकार के मुताबिक, अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच यहां कुल 60,354 लीटर से ज्यादा भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की बिक्री हुई. जिससे गुजरात सरकार को करीब 87.39 लाख रुपये का राजस्व भी मिला है.

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एक साल तेज हुई बिक्री हाल ही में जारी किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच GIFT सिटी में सिर्फ 3,716 लीटर शराब बिकी थी.

लेकिन अगस्त 2025 से जुलाई 2026 के बीच ये बिक्री बढ़कर 56,638 लीटर हो गई.

इसका मतलब है कि पिछले एक साल में शराब की बिक्री 15 गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है.

दो साल में कितनी हुई बिक्री?

GIFT सिटी में पिछले दो सालों में भी ताबड़तोड़ शराब की बिक्री हुई है. साल 2024 से 2025 के बीच करीब 3,716 लीटर शराब बिकी थी.

तो वहीं साल 2025 से 2026 के बीच 56,638 लीटर शराब बिकी. इन दो सालों का आंकड़ा मिलाकर कुल 60,354 लीटर होता है.

इसका मतलब है कि दो सालों में करीब 60 हजार लीटर से भी ज्यादा शराब की बिक्री हुई है.

सिर्फ GIFT सिटी में है शराब की अनुमति

GIFT सिटी को इंटरनेशनल लेवल के वित्तीय और टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है.

सरकार का कहना था कि यहां देश-विदेश की कंपनियां, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ काम करते

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

गुजरात के GIFT सिटी में शराब पर हाल ही में लगाया गया बैन के बावजूद, एक वर्ष में शराब की बिक्री 15 गुना बढ़ गई है। यह घटना राज्य के शराब नियंत्रण नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। सरकार द्वारा जारी आंकड़े दिखाते हैं कि बैन के बावजूद शराब का व्यापार बढ़ रहा है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून प्रवर्तन के लिए चुनौती बनता है। यदि इस प्रवृत्ति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो समाज में शराब से जुड़ी दुर्घटनाएँ, स्वास्थ्य समस्याएँ और सामाजिक कलंक बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता को नकारात्मक प्रभाव पड़

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