गुरु की शिष्य को सीख:बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वयं को उसके योग्य बनाना पड़ता है, सही जानकारी, धैर्य और मेहनत से सफलता मिलती है
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →एक लोक कथा है। पुराने समय में एक आश्रम में एक गुरु अपने शिष्यों को शिक्षा दे रहे थे। एक दिन आश्रम में एक नया शिष्य आया। उसने देखा कि सभी शिष्य गुरु की बात बड़े ध्यान से सुनते हैं। गुरु के ज्ञान और व्यवहार के कारण हर कोई उनका आदर करता है। यह देखकर नए शिष्य के मन में भी इच्छा जागी कि वह भी जल्दी से जल्दी गुरु बन जाए, ताकि उसे भी इतना सम्मान मिले।
उसने गुरु से कहा, "गुरु जी, मैं भी आपकी तरह गुरु बनना चाहता हूं। मेरी इच्छा है कि मेरे भी कई शिष्य हों और लोग मुझे भी आपकी तरह सम्मान दें।" गुरु ने उसकी बात सुनी और शांत स्वर में कहा, "तुम्हारी इच्छा अच्छी है, लेकिन इसे पूरा करने के लिए तुम्हें कई वर्षों तक मेहनत करनी होगी। तुम्हें धैर्य रखना होगा, ज्ञान हासिल करना होगा और अपने अनुभव को बढ़ाना होगा।
केवल गुरु का पद पाने की इच्छा रखने से कोई अच्छा गुरु नहीं बन जाता।" शिष्य ने पूछा, "लेकिन गुरु जी, मुझे इतना इंतजार क्यों करना पड़ेगा?
मैं आज से ही दूसरों को ज्ञान क्यों नहीं दे सकता?" गुरु मुस्कुराए। उस समय वे लकड़ी के एक तख्त पर बैठे हुए थे। उन्होंने शिष्य को तख्ते के पास बुलाया। शिष्य तख्त के पास खड़ा हुआ, तो गुरु स्वयं उस तख्त पर खड़े हो गए। फिर गुरु ने कहा, "अब मुझे पास रखे हुए ऊपर वाले तख्ते पर पहुंचा दो।" शिष्य कुछ क्षण सोचता रहा और फिर बोला, "गुरु जी, मैं खुद नीचे खड़ा हूं। मैं आपको और ऊपर कैसे पहुंचा सकता हूं?
इसके लिए तो पहले मुझे खुद ऊपर आना पड़ेगा।" गुरु हंसते हुए बोले, "यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। यदि तुम किसी दूसरे को ऊपर उठाना चाहते हो, तो सबसे पहले तुम्हें खुद अपना स्तर ऊंचा करना होगा। अगर तुम्हारे पास पर्याप्त ज्ञान, अनुभव और सही-गलत की समझ ही नहीं है, तो तुम किसी और का मार्गदर्शन कैसे करोगे?" शिष्य को गुरु की बात समझ आ गई।
उसने तुरंत गुरु बनने की इच्छा छोड़ने के बजाय अपने लक्ष्य तक पहुंचने की सही राह चुन ली। उसने मन लगाकर अध्ययन किया, कठिन साधना की, अनुभव प्राप्त किया और कई वर्षों तक धैर्य के साथ स्वयं को बेहतर बनाया। समय के साथ उसका ज्ञान और समझ बढ़ती गई। अब वह दूसरों को केवल बातें नहीं बताता था, बल्कि अपने अनुभव से उनका मार्गदर्शन भी कर सकता था।
इस कथा का संदेश यह है कि जीवन में कोई भी बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए पहले स्वयं को उसके योग्य बनाना पड़ता है। सही जानकारी, धैर्य, मेहनत और उचित समय का इंतजार सफलता की मजबूत नींव तैयार करते हैं। कथा की सीख
📡 स्रोत: NewsData.io