Gym जाने वाले जरा ध्यान दें, प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स वाली कंपनियों का इलाज करेगा FDA
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महाराष्ट्र का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) न्यूट्रास्यूटिकल्स और हेल्थ सप्लीमेंट जैसी प्रोडक्ट्स की जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.
ऐसे में अगर आप भी Gym जाते हैं और प्रोटीन पाउडर, हेल्थ सप्लीमेंट या दूसरे न्यूट्रास्यूटिकल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है.
क्योंकि अब इसमें सिर्फ पैकेजिंग या लेबल ही नहीं, बल्कि प्रोडक्ट में इस्तेमाल की गई सामग्री, उसके सेवन और बिक्री से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है.
दरअसल, महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने इन उत्पादों को लेकर चिंता जताई है.
उनका कहना कि कुछ प्रोडक्ट्स में ऐसे तत्व मौजूद होने का दावा किया जाता है, जो असल में उनमें मौजूद नहीं होते. ऐसे में सप्लीमेंट्स के दावों और उनकी वास्तविक सामग्री पर भी FDA नजर रखेगा.
सप्लीमेंट्स के विज्ञापनों पर क्यों उठ रहे सवाल?
न्यूट्रास्यूटिकल्स के विज्ञापनों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं.
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) के मुताबिक, भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स को खाद्य पदार्थों की कैटेगरी में रखा जाता है, लेकिन कई बार इनके विज्ञापनों में बीमारी या इलाज से जुड़े दावे किए जाते हैं.
ASCI की 2025-26 की शिकायत रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य और पेय पदार्थों से जुड़े जिन विज्ञापनों की जांच की गई, उनमें 52% मामले न्यूट्रास्यूटिकल्स से जुड़े थे.
इनमें से 96% विज्ञापनों में बदलाव की जरूरत पाई गई.
वहीं कई विज्ञापनों में वजन घटाने, हेल्थ, पुरानी बीमारियों, बच्चों की ग्रोथ, फर्टिलिटी और शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए गए.
सप्लीमेंट के पैकेट पर क्या जानकारी जरूरी है?
FSSAI के नियमों के मुताबिक, प्रोडक्ट किस कैटेगरी में आता है, जैसे हेल्थ सप्लीमेंट या न्यूट्रास्यूटिकल इसकी जानकारी होनी चाहिए.
इसमें मौजूद प्रमुख सामग्री और उनकी मात्रा के बारे में बताना है.
साथ ही इसके इस्तेमाल करने का सही तरीका और अनुशंसित मात्रा भी लि
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar