हैदराबाद में वोटर लिस्ट से 30 नाम हटाने का आरोप, कांग्रेस ने की जांच की मांग
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तेलंगाना के मुशीराबाद में वोटर लिस्ट से एक मुस्लिम परिवार के करीब 30 सदस्यों के नाम हटाने की कथित कोशिश के बाद तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी से शिकायत की गई है.
कांग्रेस का आरोप है कि उनके नाम हटाने के लिए पहले से प्रिंट किए गए 'फॉर्म-7' आवेदनों का इस्तेमाल किया गया था.
1 अक्टूबर को की गई यह शिकायत तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चुनाव आयोग समन्वय समिति के चेयरमैन पुलिपति राजेश कुमार और मोहम्मद वाजिद हुसैन ने दर्ज कराई थी.
इसमें विवादित आवेदनों के सिलसिले में पोलिंग बूथ नंबर 210 के लिए बीजेपी के बूथ-लेवल एजेंट (BLA) बताए जा रहे एस. बालचंद्र (बालू) का नाम लिया गया है.
नाम हटाने की कोशिश की गई
शिकायत में कांग्रेस के BLA शफुद्दीन और उनके परिवार के करीब 30 सदस्यों की पहचान उन लोगों के तौर पर की गई है जिनके नाम हटाने की कोशिश की गई.
आरोप है कि 'फॉर्म-7' आवेदन पहले से तैयार और प्रिंट किए गए थे, न कि आवेदक के तौर पर दिखाए गए लोगों ने उन्हें खुद भरा था.
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह असली आवेदनों को सुरक्षित रखे और हस्ताक्षर, लिखावट, तारीख, मोबाइल नंबर, वोटर फोटो पहचान पत्र की जानकारी और सहायक दस्तावेजों की जांच करे.
पार्टी ने आवेदकों के बयान भी मांगे हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या उन्होंने खुद फॉर्म तैयार किए, उन पर हस्ताक्षर किए और उन्हें जमा किया था.
अधिकारियों को क्या दिए गए जांच
शिकायत में अधिकारियों से यह जांचने को कहा गया है कि क्या फॉर्म की फॉर्मेटिंग, लिखावट या अन्य विशेषताएं एक जैसी हैं, जिससे किसी एक ही स्रोत का पता चलता हो.
इसमें इस बात की भी जांच की मांग की गई है कि क्या कांग्रेस के अन्य नेताओं, उनके परिवार के सदस्यों या अन्य मतदाताओं के खिलाफ भी ऐसे ही आवेदन जमा किए गए थे. शिकायत में खास तौर पर एस.
बालचंद्र की भूमिका की जांच की मांग की गई है और यह पता लगाने को कहा गया है कि क्या उन्होंने खुद आवेदन जमा किए थे या उन्हें जमा करने में मदद की थी.
चुनाव आयो
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
हैदराबाद के मुशीराबाद में एक मुस्लिम परिवार के करीब 30 वोटर नामों को हटाने का दावा है, जिसके चलते कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जाँच की मांग की है। यह मामला चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सवाल उठाता है। यदि नाम हटाने की बात सत्य है, तो यह नागरिकों के मतदान अधिकारों को प्रभावित कर सकता है और राजनीतिक असंतोष बढ़ा सकता है। जनता को यह जानना ज़रूरी है कि चुनावी सूचियों की शुद्धता कैसे सुनिश्चित की जाती है और किसी भी दुरुपयोग को कैसे रोका जाता है।