2 हज़ार रुपये तक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा
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सितंबर 25, नई दिल्ली: UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर नई व्यवस्था की तस्वीर साफ हो गई है। नई व्यवस्था के तहत आम ग्राहकों पर MDR का बोझ नहीं डाला जाएगा। 15 अक्टूबर 2026 से 2 हजार रुपये तक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा, जबकि 2 हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P UPI भुगतान किसी भी राशि पर मुफ्त रहेंगे। छोटे कारोबारियों को भी MDR से राहत दी गई है। QR कोड के जरिए अपने बैंक खाते में महीने में एक लाख रुपये तक UPI भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को MDR से छूट मिलेगी। उपलब्ध सरकारी प्रावधानों के मुताबिक, इससे करीब 96 प्रतिशत UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
जिन पात्र P2M लेनदेन पर MDR लागू होगा, उनमें 0.4 प्रतिशत की सामान्य दर तय की गई है। 75 हजार रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, ईंधन और कुछ अन्य आवश्यक क्षेत्रों में 2 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा।
नई व्यवस्था के तहत MDR की वसूली का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और ग्राहक सेवाओं जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। सरकार और नियामकीय व्यवस्था के तहत MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है।
UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में UPI के जरिए 24 अरब 50 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब 29 लाख 82 हजार करोड़ रुपये रही।
इस नई व्यवस्था का मकसद UPI की व्यापक पहुंच और सुविधा को बनाए रखते हुए डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए दीर्घकालिक वित्तीय मॉडल तैयार करना है।
फ़ाइल फ़ोटो