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हजारीबाग के बरही में वर्ष 1910 से हो रही सार्वजनिक दुर्गा पूजा में बेदाग केला और कच्चू चढ़ाने की परंपरा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हजारीबाग के बरही में वर्ष 1910 से हो रही सार्वजनिक दुर्गा पूजा में बेदाग केला और कच्चू चढ़ाने की परंपरा

हजारीबाग में वर्ष 1910 से चली आ रही है सार्वजनिक दुर्गा पूजा की परंपरा, घास-फूस के पंडाल से लेकर भव्य मंदिर तक का सफर, युवाओं और बाबा जी ने साझा किया इतिहास, पूर्वजों की इस अनमोल विरासत को आगे बढ़ा रही नई पीढ़ी।

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हजारीबाग में 1910 से चली आ रही है सार्वजनिक दुर्गा पूजा की परंपरा

घास-फूस के पंडाल से लेकर भव्य मंदिर तक का सफर

युवाओं और बाबा जी ने साझा किए इतिहास के पन्ने

पूर्वजों की इस अनमोल विरासत को आगे बढ़ा रही नई पीढ़ी

एंकर हजारीबाग जिले के बरही स्थित दुर्गा मंदिर में वर्ष 1910 से सार्वजनिक रूप से माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना का शुभारंभ किया गया था। तब से लेकर आज तक यह ऐतिहासिक परंपरा पूरी अनवरत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई जा रही है। आइए जानते हैं बरही की इस दुर्गा पूजा की पूरी कहानी।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. हजारीबाग के बाहरी के स्थानीय बुजुर्गों और युवाओं ने बताया कि शुरुआत के दौर में यहाँ माँ दुर्गा की पूजा घास-फूस और पुआल से बने साधारण पंडालों में की जाती थी। कालांतर में समय के साथ स्थानीय लोगों के सहयोग से इसे विकसित किया गया और एक भव्य मंदिर का स्वरूप दिया गया।

वीओ 02. इस पूजा से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि यह पारंपरिक पावन त्योहार उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत के रूप में मिला है। अब यह हम सबकी और खासकर युवा पीढ़ी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे इस सांस्कृतिक धरोहर को सहेजकर रखें और इसे आने वाली पीढ़ियों को सुचारू रूप से सौंपें।

वीओ 03. इस पारंपरिक पूजा की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यहाँ अर्पित किया जाने वाला भोग है। यहाँ माता को भोग के रूप में विशेष तौर पर केला और कद्दू चढ़ाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी शर्त यह होती है कि ये फल पूरी तरह से स्वस्थ और बेदाग होने चाहिए ।

अंतिम वीओ सन 1910 से शुरू हुई माँ दुर्गा की आराधना की यह पावन परंपरा आज भी बरही के दुर्गा मंदिर में पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है। पूर्वजों के आशीर्वाद और नई पीढ़ी के समर्पण से सजी यह विरासत आज भी बरही की सांस्कृतिक पहचान को रोशन कर रही है।

हजारीबाग से नितेश की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।