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हजारीबाग में ड्रोन से खेती का प्रयोग, तकनीक से खेती की लागत और समय घटाने की तैयारी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हजारीबाग में ड्रोन से खेती का प्रयोग, तकनीक से खेती की लागत और समय घटाने की तैयारी

हजारीबाग के तीन प्रखंडों के पांच स्थानों पर ड्रोन से कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव का ट्रायल शुरू, महिलाओं और युवाओं को ड्रोन संचालन से जोड़ने की भी तैयारी।

Short Headline: हजारीबाग में ड्रोन से खेती का प्रयोग, तकनीक से खेती की लागत और समय घटाने की तैयारी

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हजारीबाग में ड्रोन से खेती का प्रयोग 3 प्रखंडों के 5 स्थानों पर ट्रायल

महिलाओं और युवाओं को जोड़ने की तैयारी

एंकर हजारीबाग में अब खेती के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी है। जिला प्रशासन तीन प्रखंडों के पांच स्थानों पर ड्रोन से कीटनाशक और उर्वरक के छिड़काव का प्रयोग कर रही है। कोशिश है कि इस तकनीक से खेती की लागत और समय कम हो, साथ ही महिलाओं और युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सके।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 1 कहते हैं, खेती में तकनीक का इस्तेमाल किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। हजारीबाग में भी इसी दिशा में पहल शुरू की गई है। बरही, पद्मा और इचाक प्रखंड के पांच स्थानों पर प्रायोगिक तौर पर ड्रोन से खेतों में कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव किया जा रहा है।

बाइट- शुभांकर गुप्ता, जिला कृषि पदाधिकारी

वीओ 2 भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोरियाकर्मा के वैज्ञानिकों के मुताबिक ड्रोन से एक एकड़ खेत में महज कुछ मिनटों में कीटनाशक या तरल उर्वरक का छिड़काव किया जा सकता है। इससे कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा और फसल को निर्धारित मात्रा में दवा या उर्वरक देने में भी मदद मिल सकती है। ड्रोन तकनीक को लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिक पंकज कुमार सिंह इसे कृषि के लिए बड़ी संभावना मानते हैं।

बाइट- पंकज कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान

वीओ 3 हजारीबाग में यह प्रयोग सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की महिलाओं और युवाओं को भी इस तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। जिला प्रशासन की कोशिश है कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाए और उनका निबंधन कराया जाए। जिला कृषि पदाधिकारी शुभांकर गुप्ता बताते हैं कि युवाओं को भी इससे जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की योजना है।

बाइट- शुभांकर गुप्ता, जिला कृषि पदाधिकारी

वीओ 4 ड्रोन से खेती की जानकारी लेने के लिए स्थानीय महिलाएं भी खेतों तक पहुंच रही हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक खेती में समय और मेहनत को कम कर सकती है। महिलाएं ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग लेने के लिए भी उत्सुक हैं।

बाइट- स्थानीय महिला

अंतिम वीओ हजारीबाग में शुरू हुआ यह प्रयोग अगर सफल रहा, तो आने वाले दिनों में खेती का तरीका भी बदल सकता है। अब नजर इस बात पर है कि पांच स्थानों पर किए जा रहे इस प्रयोग के नतीजे क्या सामने आते हैं।

हजारीबाग से गौरव प्रकाश की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।