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हर दर से निराश लौटे BHEL के दिवंगत कर्मचारियों के परिजन, अब मृणालिनी सेंगर से लगाई न्याय की गुहार, देखें वीडियो

लेखक: Aazam Lala अंतिम अपडेट: 5 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हर दर से निराश लौटे BHEL के दिवंगत कर्मचारियों के परिजन, अब मृणालिनी सेंगर से लगाई न्याय की गुहार, देखें वीडियो

कोविड में अपनों को खोने वाले परिवारों की पांच साल बाद बंद हुई आर्थिक सहायता; छह महीने से BHEL प्रबंधन के चक्कर लगा रहे आश्रितों की आवाज बनीं समाजसेविका मृणालिनी सेंगर

भोपाल। कोविड महामारी ने कई परिवारों से उनका कमाने वाला सदस्य छीन लिया। उस मुश्किल दौर में BHEL प्रबंधन ने दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहारा देने के लिए कोविड सहायता योजना शुरू की थी। परिवारों को उम्मीद थी कि यह मदद आगे भी जारी रहेगी, लेकिन पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद सहायता बंद कर दी गई। अब प्रभावित परिवार पिछले पांच से छह महीनों से योजना दोबारा शुरू कराने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी राहत नहीं मिलने पर इन परिवारों ने समाजसेविका मृणालिनी सेंगर से मदद की गुहार लगाई है।

पांच साल की सहायता के बाद परिवारों के सामने फिर आर्थिक संकट

परिजनों के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान BHEL में कार्यरत कर्मचारियों के निधन के बाद उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी। उस समय योजना पांच साल के लिए लागू किए जाने और आगे बढ़ाए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, पांच साल पूरे होने के बाद सहायता बंद कर दी गई।

परिवारों का कहना है कि उन्होंने योजना को जारी रखने की मांग को लेकर पिछले पांच से छह महीनों में कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, आवेदन दिए और अपनी परिस्थितियां बताईं। इसके बावजूद अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है।

कमाने वाले सदस्य के जाने के बाद बच्चों के भविष्य की चिंता

इन परिवारों की मुश्किल केवल आर्थिक सहायता बंद होने तक सीमित नहीं है। किसी ने पति खोया, किसी ने पिता और किसी बच्चे के सिर से कम उम्र में ही पिता का साया उठ गया। परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, बिजली-पानी के बिल और रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंध करना लगातार कठिन होता जा रहा है।

परिजनों का कहना है कि महामारी के दौरान परिवार के कमाने वाले सदस्य को खोने के बाद BHEL की आर्थिक सहायता उनके लिए बड़ा सहारा थी। अब यह मदद बंद होने से उनकी आर्थिक चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

मृणालिनी सेंगर ने BHEL प्रबंधन तक पहुंचाई परिवारों की मांग

प्रभावित परिवारों ने समाजसेविका मृणालिनी सेंगर को आवेदन सौंपकर कोविड सहायता योजना दोबारा शुरू कराने की मांग की है। मृणालिनी सेंगर ने परिवारों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांग को संबंधित प्रबंधन के समक्ष उठाने की बात कही।

उनका कहना है कि किसी कर्मचारी के निधन के बाद उसके परिवार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे परिवारों की समस्याओं को केवल औपचारिक आवेदन या कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके बच्चों की शिक्षा, परिवार की आजीविका और भविष्य की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार होना चाहिए।

BHEL प्रबंधन से परिवारों की मांग—सहायता योजना पर हो पुनर्विचार

प्रभावित परिवार चाहते हैं कि BHEL प्रबंधन कोविड सहायता योजना को दोबारा शुरू करने या प्रभावित आश्रितों के लिए कोई वैकल्पिक आर्थिक सहायता व्यवस्था बनाने पर गंभीरता से विचार करे। उनका सवाल है कि जिन परिवारों ने महामारी के दौरान अपने कमाने वाले सदस्य खोए, उनकी आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियां पांच साल बाद समाप्त नहीं हो जातीं।

अब देखना होगा कि BHEL प्रबंधन इन परिवारों की मांग पर क्या निर्णय लेता है। जरूरत है कि प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों, बच्चों के भविष्य और उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से समाधान निकाला जाए।

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Aazam Lala

आज़म लाला भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।