इतिहास

हर शुक्रवार एक पंचायत या गांव की कहानी, आज पढ़िए कालिंजर के बारे में

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हर शुक्रवार एक पंचायत या गांव की कहानी, आज पढ़िए कालिंजर के बारे में

भास्कर न्यूज | राजसमंद कुंभलगढ़ पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कालिंजर क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से भले ही छोटी हो, लेकिन पिछले छह वर्षों से चल रहे पर्यावरण संरक्षण के प्रयास अब इसे नई पहचान दिलाने की ओर बढ़ रहे हैं। राजसमंद की पिपलांत्री की तर्ज पर कालिंजर को भी जिले के प्रमुख पर्यावरण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

यहां पौधरोपण के साथ महाबलिदानी पन्नाधाय के जीवन, त्याग और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जा रहा है। ग्राम पंचायत के अंतर्गत मादरेचों का गुढ़ा, कालिंजर, गांगागुढ़ा, जीतरिया और चतराजी का गुढ़ा सहित कई राजस्व गांव आते हैं। इनमें मादरेचों का गुढ़ा में पर्यावरण संरक्षण के तहत लगातार पौधरोपण और हरियाली विकसित की जा रही है।

आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष नानजी गुर्जर की ओर से यहां 10 हेक्टेयर चरागाह भूमि पर राष्ट्रधर्मी माता पन्नाधाय वनस्थली गंगासागर विकसित की जा रही है। ट्रस्ट अध्यक्ष नानजी गुर्जर ने बताया कि वनस्थली में पन्नाधाय के जीवन से जुड़े प्रसंगों को प्रतिमाओं के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

उनके त्याग और बलिदान से जुड़े प्रसंग लिखित रूप में भी लगाए जाएंगे, ताकि यहां आने वाले लोगों को उनके जीवन और ऐतिहासिक बलिदान की जानकारी मिल सके। वनस्थली को वर्ष 2030 तक पन्नाधाय संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना है। ट्रस्ट की ओर से पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में अब तक करीब साढ़े तीन लाख पौधे वितरित किए जा चुके हैं।

मादरेचों का गुढ़ा की 10 हेक्टेयर भूमि पर वर्ष 2028 तक सवा लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। अब तक करीब 45 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। ट्रस्ट से जुड़ने वाले प्रत्येक सदस्य को पांच पौधों की पौधशाला तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय हो।

पौधों की सिंचाई के लिए करीब 70 साल पुरानी कुई का जीर्णोद्धार कर उसे बड़े कुएं के रूप में विकसित किया गया है। इससे वनस्थली और आसपास लगाए गए पौधों के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। कालिंजर में पौधरोपण के साथ जल संरक्षण, पौधों की देखभाल और जनभागीदारी को भी जोड़ा जा रहा है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पौधों का संरक्षण और विकास हुआ तो कालिंजर पर्यावरण और ऐतिहासिक विरासत के संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

ग्राम पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या : 5000 जिला मुख्यालय से दूरी : 25 किलोमीटर साक्षरता दर : 70 प्रतिशत मुख्य फसलें : गेहूं, मक्का आय स्रोत : मजदूरी और कृषि पहचान : कालिंजर में धर्मराज बावजी का मंदिर

📡 स्रोत: NewsData.io

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