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‘हरबूजी का कोट’ नाम को मिली मान्यता

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 24 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
‘हरबूजी का कोट’ नाम को मिली मान्यता

सुजानगढ़ के ऐतिहासिक नाम को लेकर कंवराज सिंह सांखला की पांच साल की मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। उनकी आपत्ति और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर IGNCA की वेबसाइट पर ‘खरबू जी का कोट’ को संशोधित कर ‘हरबू जी का कोट’ किया गया।

24 अक्तूबर,चूरू। राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ शहर के ऐतिहासिक नाम को लेकर लंबे समय से चल रही तथ्यात्मक सुधार की मुहिम में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। स्थानीय जागरूक नागरिक और सरकारी शिक्षक कंवराज सिंह सांखला की आपत्ति के बाद भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) की आधिकारिक वेबसाइट पर सुजानगढ़ के पुराने नाम में संशोधन किया गया है।

वेबसाइट पर पहले दर्ज ‘खरबू जी का कोट’ नाम को हटाकर अब ‘हरबू जी का कोट’ दर्ज किया गया है। इस सुधार को सुजानगढ़ के इतिहास से जुड़े तथ्यों को प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर दर्ज कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पांच साल से ऐतिहासिक नाम में सुधार की मुहिम चला रहे सांखला

जैसलमेर जिले के डेलासर गांव के निवासी और सरकारी शिक्षक कंवराज सिंह सांखला पिछले करीब पांच वर्षों से सुजानगढ़ के ऐतिहासिक नाम में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि विभिन्न वेबसाइटों और संस्थानों के ऐतिहासिक विवरणों में सुजानगढ़ का पुराना नाम गलत तरीके से दर्ज था। इसे ठीक कराने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया और संबंधित संस्थानों को प्रमाणों के साथ आपत्तियां भेजीं।

सांखला के प्रयासों के बाद अब तक विभिन्न संस्थागत वेबसाइटों पर इस ऐतिहासिक नाम में संशोधन किया गया है। इससे पहले सुजानगढ़ के जी.एच.एस. राजकीय महाविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी शहर के इतिहास से जुड़ी जानकारी में सुधार किया गया था। अब IGNCA की वेबसाइट पर संशोधन होने से इस मुहिम को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

ईमेल से आपत्ति, आरटीआई के जरिए मांगी जानकारी

कंवराज सिंह सांखला ने IGNCA की वेबसाइट पर प्रकाशित ‘Bikaner Tourist and Important Places’ सामग्री में सुजानगढ़ के पुराने नाम को लेकर दर्ज त्रुटि पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने 14 सितंबर 2026 को ईमेल के माध्यम से संबंधित संस्थान को लिखित शिकायत भेजकर प्रकाशित जानकारी के स्रोत का दोबारा सत्यापन करने और प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर सुधार करने की मांग की।

इसी दिन उन्होंने इस मामले में सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन भी दाखिल किया, जिसका पंजीकरण क्रमांक IGNCA/R/E/26/00032 बताया गया है।

सांखला की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को IGNCA की ओर से प्राप्त लिखित जवाब में वेबसाइट पर दर्ज पुराने नाम में संशोधन किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद वेबसाइट पर ‘खरबू जी का कोट’ के स्थान पर ‘हरबू जी का कोट’ नाम दर्ज किया गया।

‘द इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया’ के ऐतिहासिक दस्तावेज का दिया हवाला

इस सुधार के लिए कंवराज सिंह सांखला ने ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक ग्रंथ The Imperial Gazetteer of India, Volume XXIII (1908) के पृष्ठ संख्या 116-117 का हवाला दिया। उनके अनुसार, इस दस्तावेज में सुजानगढ़ के पुराने नाम का उल्लेख ‘हरबूजी-का-कोट’ के रूप में मिलता है।

ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, इस स्थान का संबंध राजपूत योद्धा हरबूजी के किले से बताया जाता है। बाद में बीकानेर के शासक महाराजा सूरत सिंह ने इस क्षेत्र में बस्ती बसाई और बीकानेर के शासक सुजान सिंह के नाम पर इसका नाम सुजानगढ़ रखा गया।

सांखला का कहना है कि ऐतिहासिक स्थलों और शहरों के नाम से संबंधित जानकारियां दर्ज करते समय मूल दस्तावेजों और प्रमाणिक ऐतिहासिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक सही जानकारी पहुंच सके।

कुलदेवता हरबूजी से जुड़ी आस्था भी बनी मुहिम की प्रेरणा

कंवराज सिंह सांखला के लिए यह प्रयास केवल किसी वेबसाइट पर एक शब्द बदलवाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि हरबूजी सांखला उनके कुलदेवता हैं और उनके पूर्वजों का भी सुजानगढ़ से जुड़ाव रहा है। इसी ऐतिहासिक और पारिवारिक जुड़ाव के चलते उन्होंने शहर के पुराने नाम से संबंधित तथ्यों को प्रमाणिक रूप में स्थापित करने का प्रयास शुरू किया।

सांखला के अनुसार, उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सुजानगढ़ के इतिहास को सही तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर सामने लाना है। उन्होंने IGNCA प्रशासन की ओर से उनकी आपत्ति पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए संशोधन किए जाने पर आभार व्यक्त किया।

कौन थे हरबूजी सांखला?

राजस्थान की लोक परंपराओं में हरबूजी, जिन्हें हड़बूजी के नाम से भी जाना जाता है, लोकदेवता के रूप में पूजनीय हैं। उनका संबंध सांखला राजपूत वंश से माना जाता है और उन्हें राजस्थान के पंचपीरों में शामिल किया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, वे बाबा रामदेवजी के मौसेरे भाई थे।

मान्यता है कि हरबूजी का जन्म नागौर जिले के भुंडेल गांव में हुआ था। उनका प्रमुख मंदिर फलोदी क्षेत्र के बेंगटी में स्थित है, जहां उनकी बैलगाड़ी की पूजा की परंपरा भी प्रचलित है। लोक आस्था में उनका विशेष स्थान है और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रति श्रद्धा देखने को मिलती है।

इतिहासकारों ने भी बताया प्रमाणिक दस्तावेजों का महत्व

सुजानगढ़ के पुराने नाम से जुड़े इस मामले में स्थानीय इतिहासकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐतिहासिक दस्तावेजों, स्थानीय परंपराओं और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर शहर के अतीत को समझने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। वेबसाइटों पर दर्ज जानकारी में सुधार होने से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

सुजानगढ़ के इतिहास को लेकर चली यह मुहिम अब ऐतिहासिक तथ्यों के दस्तावेजीकरण और उनके सत्यापन की चर्चा का विषय बन गई है। IGNCA की वेबसाइट पर किए गए संशोधन के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य संस्थानों में भी ऐतिहासिक विवरणों का सत्यापन कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।