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हेमंत सोरेन को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की याचिका, कहा - 'आगे की जांच...'

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हेमंत सोरेन को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की याचिका, कहा - 'आगे की जांच...'

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को PMLA मामले में सोमवार को रांची की विशेष अदालत से झटका लगा.

ECIR 06/2023 में चार्ज फ्रेम करने की कार्यवाही टालने के लिए सोरेन की ओर से दायर अर्जी को विशेष PMLA अदालत ने खारिज कर दिया.

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आगे की जांच लंबित होने के आधार पर पहले से दायर अभियोजन शिकायत पर कार्यवाही रोकना जरूरी नहीं है.

सोरेन ने क्या दलील दी?

आरोपी नंबर-2 हेमंत सोरेन की ओर से दायर अर्जी में कहा गया था कि मामले में आगे की जांच जारी है और ED ने अपनी अभियोजन शिकायत में जरूरत पड़ने पर पूरक शिकायत दाखिल करने की अनुमति मांगी है.

इसलिए अभी मामला चार्ज फ्रेम करने के लिए तैयार नहीं है.

बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के 'वीनू भाई हरि भाई मालवीय' फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चार्ज फ्रेम होने के बाद जांच जारी रखने की स्थिति नहीं रहनी चाहिए.

ED ने किया विरोध

ED के विशेष लोक अभियोजक ने अर्जी का विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी की कोशिश बताया.

ED की ओर से कहा गया कि सोरेन की ओर से पहले भी डिस्चार्ज की मांग की जा चुकी है, जिसे विशेष अदालत ने 8 जून 2026 को खारिज कर दिया था.

इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट में दायर रिवीजन में भी आगे की कार्यवाही पर रोक की मांग वाली अर्जी 18 सितंबर को खारिज हो चुकी है.

अदालत ने क्या कहा

विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की धारा 44 के तहत मूल अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद भी आगे की जांच की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर पूरक शिकायत दाखिल की जा सकती है.

बाद में सामने आने वाला अतिरिक्त मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य मूल शिकायत का हिस्सा माना जा सकता है.

इसलिए आगे की जांच लंबित होना अपने आप में मौजूदा कार्यवाही रोकने की कानूनी बाधा नहीं है.

अदालत ने यह भी कहा कि आगे की जांच के दौरान नया साक्ष्य या किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर ED कानून के मुताबिक उसे अदालत के समक्ष रख सकती है, लेकिन इस

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ PMLA (भ्रष्टाचार विरोधी) मामले में रांची की विशेष अदालत द्वारा उनकी याचिका के खारिज होने से संबंधित है। अदालत ने कहा कि केवल आगे की जांच लंबित होने के कारण पहले से दायर अभियोजन शिकायत पर कार्यवाही रोकना आवश्यक नहीं है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि उच्च पदस्थ राजनेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में भी न्यायिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, और किसी भी तरह की अनदेखी से कानूनी निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं। आम जनता पर इसका

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