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हिमाचल में मानसून की तबाही से 3,03 लोगों की मौत,3,211 करोड़ का नुकसान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हिमाचल में मानसून की तबाही से 3,03 लोगों की मौत,3,211 करोड़ का नुकसान

शिमला: हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों ने भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की 14 सितंबर 2026 तक की संचयी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 303 लोगों की जान गई है, जबकि 525 लोग घायल हुए हैं और 4 लोग लापता हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से 123 लोगों की मौत हुई। इनमें सबसे अधिक 44 मौतें पेड़ या खड़ी चट्टान से गिरने, 18 भूस्खलन, 17 डूबने, 12 सर्पदंश, 10 बिजली गिरने/इलेक्ट्रोक्यूशन से जुड़ी मौतें, जबकि अन्य कारणों से भी जानें गईं।

जिलावार आंकड़ों में शिमला में 20, कांगड़ा में 18, चंबा में 16, सिरमौर में 15, लाहौल-स्पीति में 15 और मंडी में 14 लोगों की मौत प्राकृतिक आपदाओं के कारण दर्ज की गई है। वहीं, मानसून सीजन में सड़क हादसों में 180 लोगों की मौत हुई है। सड़क दुर्घटनाओं में चंबा, कांगड़ा और शिमला में 23-23 मौतें दर्ज की गईं, जबकि सिरमौर में 21 और ऊना में 20 लोगों की जान गई। मानसून से प्रदेश में बड़े पैमाने पर निजी और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट में कुल आर्थिक नुकसान 3,21,191.90 लाख रुपये, यानी करीब 3,211.92 करोड़ रुपये आंका गया है।

प्राकृतिक आपदाओं के कारण 129 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 502 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा दुकानें, फैक्ट्रियां, श्रमिक शेड, गौशालाएं और घराट/श्मशान घाट भी प्रभावित हुए हैं। 524 पशुओं की मौत भी रिपोर्ट में दर्ज की गई है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए 1,212 लाख रुपये यानी 12.12 करोड़ रुपये की एक्स-ग्रेशिया राशि दर्ज की गई है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़ और सड़क दुर्घटनाओं ने 303 लोगों की जान ली, 525 घायल हुए और 4 लापता हैं। यह विषय प्राकृतिक आपदाओं और सड़क सुरक्षा के बीच जटिल संबंध को दर्शाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि मौसम के बदलाव से न केवल जीवन खतरे में पड़ता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी 3,211 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आम जनता पर इसका असर गहरा है: परिवारों को आर्थिक संकट, बुनियादी सुविधाओं में व्यवधान, और मानसिक आघात के साथ-साथ सरकार को आपदा प्रबंधन और सड़क सुरक्षा सुधारने

🎙️ जनता का संदेश का मत

हिमाचल की इस विनाशकारी मानसून से हमें यह सिखने को मिलता है कि प्रकृति की शक्ति को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। सुरक्षित मार्गों का चयन, समय पर सूचनाओं का पालन और आपातकालीन योजनाएँ बनाना जीवन बचाने के प्रमुख उपाय हैं। जब दुर्घटनाएँ घटती हैं, तो सहानुभूति और त्वरित सहायता से पीड़ितों को सांत्वना और पुनर्वास का मार्ग दिखाया जा सकता है। समाज को आपसी सहयोग और जागरूकता के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।