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हिमालय दिवस: हिमालय की रक्षा करना धर्म की रक्षा करने के समान, इसके संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा जरूरी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
हिमालय दिवस: हिमालय की रक्षा करना धर्म की रक्षा करने के समान, इसके संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा जरूरी

Date- 9 August 2026, Delhi

हिमालय को बचाने और उसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 9 सितंबर को हिमालय दिवस मनाया जाता है। हिमालय सिर्फ पहाड़ नहीं, भारत की जीवनरेखा है-हमारी हवा, पानी, जंगल, मिट्टी और हजारों नदियों का स्रोत है। पर्यावरणविद् एवं पद्मभूषण से सम्मानित अनिल जोशी द्वारा हिमालय दिवस की शुरुआत की गई थी, ताकि हिमालय के महत्व और इसके संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।

हिमालय शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है – हिम + आलय, मतलब बर्फ का घर। यह दुनिया की सबसे ऊंची और सबसे युवा पर्वत श्रृंखला है। हिमालय भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत में बहुत महत्व रखता है। यह पर्वत श्रृंखला भूगोल के साथ-साथ जीव विज्ञान और संस्कृति में भी महत्वपूर्ण है।

हिमालय पर्वत पश्चिम-उत्तर पश्चिम से पूर्व-दक्षिण पूर्व तक 2400 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसके पश्चिम में नंगा पर्वत और पूर्व में नमचा बरवा इसके आधार हैं। उत्तरी हिमालय काराकोरम और हिंदू कुश पर्वतों से घिरा हुआ है। सिंधु-त्सांगपो सिवनी एक सीमा के रूप में कार्य करती है, जो 50 से 60 किलोमीटर चौड़ी है, जो इसे उत्तरी दिशा में तिब्बती पठार से अलग करती है।

हिमालय भारत, नेपाल, भूटान, चीन (तिब्बत) और पाकिस्तान—5 देशों में फैला है। भारत में 12 राज्य हिमालय से जुड़े हैं-जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल और पूर्वोत्तर के राज्य।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।