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हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, लोकजीवन और संस्कृति की पहचान: डॉ. अजय खेमरिया ने विद्यार्थियों से कहा भाषा की जड़ों को समझें

लेखक: Kuldeep Sharma अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, लोकजीवन और संस्कृति की पहचान: डॉ. अजय खेमरिया ने विद्यार्थियों से कहा भाषा की जड़ों को समझें

शिवपुरी। गुरु नानक इंटरनेशनल स्कूल में मंगलवार, 15 सितंबर को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के दिव्यांगजन आयुक्त एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अजय खेमरिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के निदेशक महिपाल अरोरा ने की, जबकि प्राचार्या कीर्ति चावला, शिक्षकगण और विद्यार्थी मौजूद रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभकिया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने स्वागत गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद हिंदी भाषा की समृद्धि, उपयोगिता और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने विषय पर अपने विचार रखते हुए तर्क और अभिव्यक्ति कौशल का प्रदर्शन किया।

मुख्य अतिथि डॉ. अजय खेमरिया ने कहा कि हिंदी को समझने के लिए केवल शब्दों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी भाषिक परंपरा, संस्कृति, लोकजीवन और बोलियों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की विभिन्न भाषाएं और बोलियां देश की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के नियमित अध्ययन, पठन-पाठन और रचनात्मक लेखन के लिए प्रेरित किया।

प्राचार्या कीर्ति चावला ने कहा कि हिंदी हमारे विचारों, भावनाओं और संस्कारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, लेखन और व्यवहार में अपनाने का आह्वान किया। निदेशक महिपाल अरोरा ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनके आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति-कौशल और रचनात्मक क्षमता को विकसित करते हैं। कार्यक्रम का समापन हिंदी के प्रति सम्मान, प्रेम और गौरव की भावना के साथ हुआ।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, यह भारत की सांस्कृतिक पहचान का आधार है। इस कार्यक्रम में डॉ. अजय खेमरिया ने विद्यार्थियों को भाषा की जड़ों और उसके सामाजिक महत्व को समझने की प्रेरणा दी। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह युवा वर्ग में मातृभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है और सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती है। जब छात्र अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व महसूस करते हैं, तो वे समाज में समरसता और विविधता को बढ़ावा देते हैं। इससे न केवल शैक्षणिक स्तर पर बल्कि सामाजिक समावेशिता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़

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Kuldeep Sharma

कुलदीप शर्मा पिछोर, शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं