हिरासत से छूटने के बाद आशुतोष रांका का पहला रिएक्शन - 'असम पुलिस की...'
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असम पुलिस ने रविवार (27 सितंबर, 2026) को रात कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनके अन्य सदस्यों को हिरासत से मुक्त कर दिया है.
हिरासत से छूटने के बाद आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पहला रिएक्शन शेयर किया है. आशुतोष ने कहा, असम पुलिस की तरफ से की गई अवैध हिरासत आखिरकार खत्म हो गई है.
हमने पुलिस से कहा है कि वे हमें वहीं छोड़ें, जहां से हमें शुरुआत में अवैध रूप से उठाया गया था.
उन्होंने कहा, मैं सचिवालय के सामने चौधरी टीला, जहां से हमें हिरासत में लिया गया था, वहीं से अपनी बात रखूंगा. जय आई अकोम!
हिरासत से पहले असम के CM को लेकर आशुतोष ने क्या कहा था?
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने रविवार (27 सितंबर, 2026) को गुवाहाटी में असम पुलिस की तरफ से हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा डर गए हैं कि अगर हमने असम के स्कूलों की सच्चाई हमने दिखा दी, तो देशभर के लोगों को पता चल जाएगा कि यहां के स्कूलों की हालत क्या है.
वो डर गए हैं कि किस तरह से काजीरंगा में हमारे लोगों का हक छीना जा रहा है.
किस तरह से जल, जंगल और जमीन छीनकर इनके कॉर्पोरेट्स को दी जा रही है, वो डर गए हैं, लेकिन हम हिमंत बिस्वा सरमा से डरने वाले नहीं है.
The illegal detention by Assam Police has finally ended.
We have asked Police to go and drop us from where we were picked up illegally in the first place 😎.
I will address the Press at Chaudhary Tila, Opp Secretariat, from where we were picked up.
Jai Ai Akom!
Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) <a href="https://x.com/AshutoshRanka/status/2104244834823536955?
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर असम पुलिस द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका की अवैध हिरासत के बाद उनके रिहा होने और उनके सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया के बारे में है। यह विषय राजनीतिक अस्थिरता और पुलिस की कार्यवाही पर जनता के विश्वास को प्रभावित करता है। रांका की रिहाई और उसकी आलोचना पुलिस की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाती है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों का कानून व्यवस्था पर भरोसा घटे, और राजनीतिक असंतोष के कारण सामाजिक आंदोलन