राजनीति

IDBI हिस्सा बिक्री पर अखिलेश को सीतारमण का करारा जवाब

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
IDBI हिस्सा बिक्री पर अखिलेश को सीतारमण का करारा जवाब

15 अक्टूबर, नई दिल्ली : आईडीबीआई बैंक की स्थिति और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है। वित्त मंत्री ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में बैंकों की स्थिति का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राजनीतिक समर्थन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय बैंकों को फोन बैंकिंग और क्रोनी कैपिटलिज्म जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

आपको बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अब तो बस सरकार का खुद को बेचना बाकी रह गया है।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि बीजेपी सरकार अपनी दुकान बंद होती देखकर 'सीजन एंड सेल' का बोर्ड लगाकर सब कुछ बेचने और फिर जल्दी से निकलने की योजना बना रही है। उनका यह बयान आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को लेकर आया।

वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा कि वर्ष 2004 से यूपीए को समाजवादी पार्टी का समर्थन प्राप्त था। ऐसे में आज बैंकों की स्थिति पर सवाल उठाने से पहले अखिलेश यादव को उस दौर में अपनी भूमिका पर भी विचार करना चाहिए। सीतारमण ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान बैंकों ने ऐसे लोगों को कर्ज दिया, जिनसे मूलधन और ब्याज की वसूली आज भी चुनौती बनी हुई है।

आईडीबीआई बैंक का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीए शासन के दौरान दिए गए कुछ कर्जों की वसूली में अब भी मुश्किलें बनी हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अपने बयान में किसी विशेष कर्जदार या कर्ज की राशि का विवरण नहीं दिया। सीतारमण ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पारदर्शी नीतियों और पूंजी निवेश के जरिए आईडीबीआई बैंक सहित बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने का काम किया है।

उन्होंने सवाल किया कि जब बैंकों की स्थिति में सुधार का दावा किया जा रहा है, तो अब इस मुद्दे पर जताई जा रही चिंता का आधार क्या है। वित्त मंत्री ने विपक्ष की आलोचना करते हुए इसे 'घड़ियाली आंसू' करार दिया। उनके इस बयान से बैंकिंग व्यवस्था, पुराने कर्जों की वसूली और यूपीए तथा एनडीए सरकारों के आर्थिक रिकॉर्ड को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।