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इंदौर में पकड़ाई अबॉर्शन किट, 3 राज्यों में मिला नेटवर्क:मेडिकल स्टोर से शुरू हुई जांच, क्वालिटी फार्मा होते हुए 'मोदी ब्रदर्स' तक पहुंची

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
इंदौर में पकड़ाई अबॉर्शन किट, 3 राज्यों में मिला नेटवर्क:मेडिकल स्टोर से शुरू हुई जांच, क्वालिटी फार्मा होते हुए 'मोदी ब्रदर्स' तक पहुंची

इंदौर में 2 महीने पहले गर्भपात की दवाओं का बड़ा जखीरा पकड़ाया था। तब से औषधि विभाग इस मामले की लिंक तलाशने में जुटा हुआ है। जब्त दस्तावेजों की गहन जांच के बाद अब मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश की कई फर्में विभाग के रडार पर आ गई हैं। विभाग अब इन सभी संदिग्ध फर्मों का वेरिफिकेशन कर रहा है।

पड़ताल की जा रही है कि ये दवाएं कहां से खरीदी गई थीं और आगे किन-किन दुकानों को बेची गईं। वहीं, इंदौर के मेडिकल स्टोर कार्तिक केमिस्ट से शुरू की गई जांच क्वालिटी फार्मा होते हुए अब बड़ी फर्म 'मोदी ब्रदर्स' तक पहुंच गई है। बिना डॉक्टर के पर्चे पर बेचते हुए पकड़ी थी 27 जुलाई को ड्रग डिपार्टमेंट और संयोगितागंज पुलिस ने एमवाय हॉस्पिटल के सामने स्थित 'कार्तिक केमिस्ट' पर छापा मारा था।

जांच के दौरान दुकान पर मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल के कॉम्बिनेशन वाली किट बिना डॉक्टर के पर्चे के बेची जाती पाई गई थी। नियमों के उल्लंघन पर टीम ने मेडिकल स्टोर को सील कर दिया था। दुकान से जब्त बिलों और कागजातों के आधार पर ही अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

खास बात यह है कि ये दवाएं 'शेड्यूल एच' (Schedule H) श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। नियम अनुसार, इनकी बिक्री केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (RMP) के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकती है। इसके साथ ही, इनकी खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है। सील करने के बाद ऐसा मिला सूत्र कार्तिक केमिस्ट पर हुई इस कार्रवाई के बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने दवा की सप्लाई से जुड़े सूत्र जुटाने शुरू किए।

मेडिकल स्टोर से मिले दस्तावेजों और जांच में सामने आई जानकारियों के आधार पर विभाग की पड़ताल आगे बढ़ी। इसी कड़ी में टीम पहले 25 सितंबर को धार कोठी स्थित क्वालिटी फर्म तक पहुंची और वहां पता चला कि फर्म के पास लाइसेंस तो है लेकिन रिकॉर्ड में जहां गोदाम बताया था वह दूसरे स्थान पर मिला।

यहां रखा स्टॉक नियमों के अनुरूप नहीं माना गया। टीम ने यहां से 10 हजार से एबॉर्शन किट जब्त की। फिर यहीं से रिकॉर्ड में लसूड़िया मोरी स्थित मोदी ब्रदर्स का सूत्र मिला और फिर 26 सितंबर को यहां दबिश दी। यहां से भी करीब 10 हजार एबॉर्शन किट जब्त की। यहां बड़ी मात्रा में ‘सेफ टी किट’ मिलीं।

स्टॉक लाइसेंस में दर्ज स्थान पर ही मिला है। इसलिए यहां मुख्य जांच स्टॉक के दस्तावेज, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अधिकृत फर्मों को की गई सप्लाई की पड़ताल पर केंद्रित है। 20 हजार से अधिक किट जब्त हुई थीं दोनों स्थानों से मिलाकर 20 हजार से ज्यादा गर्भपात किट जब्त की गईं। अब विभाग इन किट की खरीद-बिक्री, बिलिंग और आगे की सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रहा है।

जांच में अब विभाग की टीमें यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं किन माध्यमों से मेडिकल स्टोर्स या अन्य लोगों तक पहुंचीं। एक कार्रवाई से खुलता गया सप्लाई नेटवर्क इस बीच कार्रवाई अलग-अलग स्तरों पर मिले दस्तावेजों और बिलों के आधार पर आगे बढ़ी। मेडिकल स्टोर से शुरू हुई पड़ताल में सप्लायर तक पहुंचने के बाद क्वालिटी फार्मा और फिर मोदी ब्रदर्स के रिकॉर्ड की जांच की गई।

अब अधिकारियों का फोकस केवल जब्त स्टॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर है कि दवा की खरीद से लेकर अंतिम बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन में कौन-कौन शामिल था। रिकॉर्ड में मिले कई फर्मों के नाम मोदी ब्रदर्स से मिले दस्तावेजों की जांच में मध्य प्रदेश की कई फर्मों के नाम सामने आए हैं।

इनके अलावा तीन अन्य राज्यों की कुछ फर्मों का रिकॉर्ड भी मिला है। विभाग अब संबंधित फर्मों से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। दो कंपनियों की दवाएं मिलीं जांच में मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल कॉम्बिनेशन वाली दवा सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों स्थानों पर मिली दवाएं अलग-अलग कंपनियों की हैं।

क्वालिटी फार्मा में ग्लोबल इनिशिएटिव कंपनी का उत्पाद मिला, जिसकी बिलिंग दूसरे राज्य से हुई थी। मोदी ब्रदर्स जननी कंपनी प्रॉड्क्ट मिला, वह भी दूसरे राज्य का था। अब इन बिलों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेन-देन का भी वेरिफिकेशन किया जा रहा है। रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका, बिक्री छिपाने की जांच जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं दवाओं के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर वास्तविक बिक्री को छिपाया तो नहीं गया।

इसके लिए खरीद और बिक्री के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि रिकॉर्ड में जितनी मात्रा खरीदी और बेची गई दिखाई गई है, वह वास्तविक स्टॉक और संबंधित फर्मों के दस्तावेजों से मेल खाती है या नहीं। डॉक्टर की निगरानी में इस्तेमाल होने वाली दवा की बिक्री पर भी फोकस जांच सूत्रों के मुताबिक इस तरह की दवा सामान्य तौर पर किसी व्यक्ति को सीधे बिक्री के लिए नहीं है और इसका इस्तेमाल डॉक्टर की देख-रेख में किया जाना चाहिए।

इसलिए जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि नियंत्रित दवाएं अनधिकृत दुकानदारों या व्यक्तियों तक कैसे पहुंचीं। विभाग अब उन कड़ियों की पहचान कर रहा है, जिनके जरिए दवाएं अधिकृत सप्लाई चैन से बाहर पहुंची हो सकती हैं। अभी शुरुआती जांच, आगे और नाम सामने आने की संभावना विभाग के अनुसार जांच अभी शुरुआती चरण में है।

जांच पूरी होने के बाद जिस भी फर्म, व्यक्ति या सप्लायर की भूमिका सामने आएगी, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ये हैं अबॉर्शन किट, दवाओं की ब्रिकी के नियम मिफेप्रिस्टोन (Mifepristone) + मिसोप्रोस्टोल (Misoprostol) का कॉम्बिनेशन भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है।

इसे सामान्य दवा की तरह बिना चिकित्सकीय पर्चे के मेडिकल स्टोर से बेचने की अनुमति नहीं है। दोनों दवाओं का संयोजन मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी में इस्तेमाल किया जाता है। भारत के नेशनल फॉर्मुलरी में मिफेप्रिस्टोन + मिसोप्रोस्टोल को Schedule H दवा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। खास बात कि यह सामान्य OTC (ओवर-द-काउंटर) दवा नहीं है।

यह Schedule H drug है। इसमें दवाओं की बिक्री Registered Medical Practitioner (RMP) के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकती है। Drugs and Cosmetics Rules के Rule 97 में Schedule H दवाओं के लिए स्पष्ट रूप से prescription-only चेतावनी निर्धारित है। इसलिए मेडिकल स्टोर द्वारा बिना रजिस्टर्ड डॉक्टर के पर्चे के ऐसी दवा बेचना नियमों के विपरीत है।

दवा की पैकेजिंग पर भी Schedule H और prescription संबंधी चेतावनी का प्रावधान है। यह खबर भी पढ़ें… इंदौर में 10 हजार से ज्यादा गर्भपात किट जब्त धार कोठी क्षेत्र में ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक दवा गोदाम पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में गर्भपात में इस्तेमाल होने वाली दवाएं जब्त की हैं।

कार्रवाई में 10 हजार से अधिक गर्भपात किट मिलने की जानकारी सामने आई है। पूरी खबर यहां पढ़ें...

📡 स्रोत: NewsData.io

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