इंडिया गठबंधन पर अमित शाह का बड़ा हमला, 'संसद चलने नहीं देते, मॉक पार्लियामेंट चला रहे'
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भाजपा राज्य कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोला.
उन्होंने विपक्षी दलों पर संसद की कार्यवाही नहीं चलने देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे संसद के बजाय मॉक पार्लियामेंट चला रहे हैं.
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई नेता मौजूद रहे.
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने विपक्षी दलों की ओर से मॉक संसद चलाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी जरूरत ही क्या है? देश में चर्चा और बहस के लिए सबसे बड़ी पंचायत संसद है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की नई इमारत भी बनवाई है.
ऐसे में विपक्ष को मॉक संसद चलाने के बजाय देश की संसद में अपनी बात रखनी चाहिए और मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए.
शाह ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों के राजनीतिक प्रदर्शन पर भी निशाना साधा.
उन्होंने कई राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इन दलों की वहां कई वर्षों से सरकार नहीं बनी है.
इसके बावजूद वे संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेकर चर्चा करने के बजाय अलग से मॉक संसद चला रहे हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा राज्य कार्यसमिति की बैठक में समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शाह ने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का जिक्र करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर निशाना साधा.
'पूरी सरयू का जल रामभक्तों के खून से लाल हुआ था'
सूत्रों के हवाले से अमित शाह ने बैठक में कहा, "आज के दिन ही 1990 में मुलायम सिंह ने कारसेवकों और रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं. किस मुंह से सरकार बनाने की बात करते हैं?
ये अखिलेश यादव एंड कंपनी मानती है कि जनता माफ कर देगी. आपकी तीसरी पीढ़ी तक को जनता माफ नहीं
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
अमित शाह ने भाजपा राज्य कार्यसमिति की बैठक में इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष संसद चलने नहीं देता और मॉक पार्लियामेंट चला रहा है। यह विषय लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों और संसद की कार्यवाही के महत्व से जुड़ा है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विपक्ष की कार्यशैली पर सार्वजनिक आक्षेप जताती है, जिससे राजनीतिक संतुलन और शासकीय प्रक्रियाओं पर प्रश्न उठते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों को संसद की कार्यवाही में विश्वास कम हो, और चुनावी माहौल में विपक्षी दलों के प्रति