इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन कौन हुआ शामिल? कांग्रेस ने दी पूरी लिस्ट
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विपक्ष के INDIA गठबंधन की बैठक शुरू हो गई है.
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर को छिड़े विवाद के बाद गठबंधन की बैठकें हो रही हैं.
इसके एजेंडे में चुनाव आयोग और उससे जुड़े विवाद हैं. चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठ रही है.
इसी बीच कांग्रेस नेता ने पोस्ट शेयर करके बताया है कि INDIA गठबंधन की बैठक में कौन-कौन सी पार्टी शामिल हुई हैं.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पूरी लिस्ट शेयर की है.
उन्होंने लिखा, INDIA गठबंधन की बैठक अभी-अभी शुरू हुई है.
इसमें शामिल पार्टियां हैं - INC, SP, AITC, NCP(SP), SS (UBT), RJD, CPM, CPI, JKNC, JKPDP, JMM, CPI-ML, IUML, KC(M), MDMK, VCK, RSP, KC(J) और AIFB.
ये और अन्य विपक्षी दल मोदी सरकार द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों से भारत के संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हैं-जिसमें सबसे ताजा है सत्ता में बने रहने के लिए ECI के जरिए वोट चोरी की साजिश.
The INDIA janbandhan meeting has just got under way.
The parties participating are INC, SP, AITC, NCP(SP), SS (UBT), RJD, CPM, CPI, JKNC, JKPDP, JMM, CPI-ML, IUML, KC(M), MDMK, VCK, RSP, KC(J) and AIFB.
These and other Opposition parties stand united to protect the Constitution
Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 30, 2026
इन दलों ने बनाई दूरी
इंडिया गठबंधन से दो पार्टियां दूरी बना चुकी हैं.
पहले इस गठबंधन में 23 पार्टियां थीं मगर अब दो कम होकर 21 रह गई हैं. आम आदमी पार्टी और डीएमके इस गठबंधन से दूर हो गई है. उनका कहना है कि इंडिया ब्लॉक से उसका लेना देना नहीं है.
वहीं अखिलेश यादव भी इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए हैं. उनकी जगह उनके दो सांसद हरिंदर मलिका और मोहिबुल्लाह नदवी
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर भारत के प्रमुख विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक के बारे में है, जिसमें कांग्रेस ने पूरी सूची साझा की है। यह विषय चुनाव आयोग के विवाद और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं से जुड़ा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि कौन-कौन सी पार्टियाँ इस गठबंधन में सक्रिय हैं और वे चुनावी प्रक्रिया पर कैसे प्रभाव डाल सकती हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि चुनावी नीतियाँ और वैधता पर सवाल उठेंगे, जिससे मतदाताओं में विश्वास और चुनावी भागीदारी