ईरान का नया दुश्मन तैयार! देश के अंदर बनने लगे सशस्त्र गुट, सुरक्षा के लिए बने खतरा
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Iran Uprising: ईरान पिछले 6 महीनों से अमेरिका और इजरायल से जूझ रहा है. सीमित संसाधनों में ईरान अमेरिका जैसे सुपर पॉवर का मुकाबला कर रहा है. अमेरिका से जूझते जूझते अब ईरान का नया दुश्मन तैयार हो रहा है.
यह दुश्मन ईरान के सामने नहीं बल्कि ईरान के अंदर ही तैयार हो रहा है.
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने कई बार देश के अंदर छोटे सशस्त्र गुटों के साथ हुई गिरफ्तारियों और झड़पों की जानकारी सार्वजनिक की है.
सीमा से लगे इलाकों में सक्रिय सशस्त्र समूहों के साथ हुई झड़पों का भी जिक्र किया गया है.
खासकर इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आईं.
हाल ही में 8 लोग गिरफ्तार ईरानी अधिकारियों ने इस युद्ध को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी लड़ाई के तौर पर पेश करने की कोशिश की है.
इसके जरिए वे देश के लोगों और विदेशों में भी यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार हालात पर नियंत्रण बनाए हुए है और दुश्मनों को रोकने में सक्षम है.
हाल ही में सामने आई एक घटना में, राज्य मीडिया ने रविवार को बताया कि कथित तौर पर "क्रांति-विरोधी" और "राजशाही समर्थक" समूहों से जुड़े 8 सदस्यीय नेटवर्क के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है.
यह भी पढ़ें: 'ईरान से जंग जीतते ही सस्ता होगा तेल', क्रूड ऑयल और गैस की कीमतों को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान जनवरी प्रदर्शन के आरोप में हुईं गिरफ्तारियां दक्षिणी प्रांत फार्स में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है.
उन पर जनवरी में हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल करने और टायर जलाने का आरोप लगाया गया है.
हाल के हफ्तों में ईरान के नेताओं ने देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बीच बढ़ते लोगों के असंतोष को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने संभावित नए विरोध प्रदर्शनों की आशंका भी जाहिर की है.
ईरान में राजशाही समर्थकों की चर्चा क्यों बढ़ी?
जनवरी में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने देश में फिर से राजशाही लागू करने का समर्थन किया. ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद राजशाही खत्म कर दी गई थी.
ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी विदेश में रहते हैं. वह ईरानी सरकार के प्रमुख विरोधियों में शामिल हैं.
जनवरी में उन्होंने ईरान के लोगों से देशभर में हड़ताल और विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। माना जाता है कि उस दौरान हुई हिंसा में हजारों लोगों की मौत हुई.
हालांकि, ईरान में रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए जाने के मामले सामने आए हैं, लेकिन फिलहाल देश के अंदर कोई बड़ा और संगठित राजशाही समर्थक सशस्त्र समूह सक्रिय नहीं है.
पिछले कुछ वर्षों में ईरान में कई बड़े देशव्यापी प्रदर्शन हुए हैं.
हालांकि, इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह राजशाही की वापसी नहीं, बल्कि आर्थिक समस्याएं और सरकार के दमन के खिलाफ लोगों का गुस्सा रहा है.
ईरान ने बताई अमेरिका और इजरायल की साजिश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध के शुरुआती महीनों में ईरान की सरकार को हटाने की संभावना पर चर्चा की थी.
ईरान के बाहर हुए प्रदर्शनों में राजशाही वापस लाने की मांग भी उठी.
इसके बाद ईरानी सरकार ने राजशाही समर्थक होने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया.
खुफिया मंत्रालय के मुताबिक, 26 प्रांतों में 111 कथित राजशाही समर्थक गुटों से जुड़े लोगों को पकड़ा गया. ईरानी अधिकारियों ने जनवरी के प्रदर्शनों को अमेरिका और इजरायल की साजिश बताया.
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर सरकारी कार्रवाई की आलोचना की है.
युद्ध के बाद कई प्रदर्शनकारियों समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया और कुछ कैदियों को फांसी भी दी गई.
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📡 स्रोत: NewsData.io