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जबलपुर- प्राकृतिक खेती से महिला कृषक माया कोरी ने घटाई खेती की लागत, मटर के उत्पादन में किया सुधार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
जबलपुर- प्राकृतिक खेती से महिला कृषक माया कोरी ने घटाई खेती की लागत, मटर के उत्पादन में किया सुधार

कृषि विभाग की आत्मा परियोजना की संचालक डॉ. इंदिरा त्रिपाठी के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती की तकनीक सीखकर वे अब स्वयं इनका उपयोग कर रही हैं और गांव के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं।

माया कोरी बताती हैं कि पहले वे पारंपरिक तरीके से खेती करती थीं। लगातार रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से खेती की लागत बढ़ रही थी, जबकि उत्पादन और मुनाफे में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही थी। इसी दौरान वे कृषि विभाग की आत्मा परियोजना से जुड़ीं। विकासखंड प्रबंधक शिक्षा श्रीवास्तव और सहायक तकनीकी प्रबंधक सपना साकेत द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कृषि भ्रमण और संगोष्ठियों में शामिल होकर उन्होंने कृषि अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों से उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाना शुरू किया।

वर्ष 2025-26 में माया कोरी ने प्राकृतिक खेती के क्लस्टर का गठन किया और कृषि सखी के रूप में कार्य करने लगीं। इस दौरान उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र और दशपर्णी जैसे प्राकृतिक कृषि आदान तैयार करना और उनका उपयोग करना सीखा। मटर की बुवाई के समय वे बीजामृत और जीवामृत का इस्तेमाल करती हैं, जबकि फसल में कीटों के नियंत्रण के लिए आवश्यकतानुसार नीमास्त्र और दशपर्णी का छिड़काव करती हैं।

माया के अनुसार, प्राकृतिक कृषि आदानों के उपयोग से फसल में कीट एवं रोगों के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिली है। वहीं, रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत में भी कमी आई है। उनका कहना है कि लगातार प्राकृतिक खेती करने से खेत की मिट्टी में सुधार दिखाई दे रहा है और मटर के दानों के आकार में भी वृद्धि हुई है।

माया कोरी अपने अनुभवों के माध्यम से गांव के अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे किसानों को प्राकृतिक कृषि आदान तैयार करने, उनका सही समय पर उपयोग करने और रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के तरीकों की जानकारी देती हैं।

माया कोरी का अनुभव बताता है कि कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर किसान खेती की लागत कम करने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती के जरिए मिट्टी की सेहत सुधारने, पर्यावरण संरक्षण और कृषि को टिकाऊ बनाने में भी मदद मिल सकती है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर जबलपुर के एक महिला कृषक, माया कोरी, के प्राकृतिक खेती के प्रयोग पर आधारित है, जहाँ उन्होंने रासायनिक इनपुट कम कर लागत घटाई और मटर की पैदावार बढ़ाई। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि सतत कृषि पद्धतियाँ किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकती हैं, जिससे वे अपने खर्च कम कर लाभ बढ़ा सकते हैं। आम जनता पर इसका असर यह है कि यदि अधिक किसान इसी मॉडल को अपनाएँ, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, खाद्य सुरक्षा में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उपभोक्ताओं को कम कीमत पर

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।