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जबलपुर- राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर सुमित्रा बनीं आत्मनिर्भर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
जबलपुर- राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर सुमित्रा बनीं आत्मनिर्भर

सुमित्रा ने मिलेट्स से बिस्किट, कुकीज और केक बनाने से अपने काम की शुरुआत 2022 में की। इसके बाद प्रशिक्षण के दौरान गोबर और फूलों से उपयोगी उत्पाद बनाने की जानकारी मिली तो उन्होंने गोबर से दीये बनाने का काम भी शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनके उत्पाद की मांग बढ़ने लगी है।

सुमित्रा पटेल के साथ अन्नपूर्णा स्वयं सहायता समूह की करीब 20 महिलाएं जुड़ी हुई हैं और यह सभी महिलायें उखरी विजय नगर से गोबर से दीये बनाने का काम कर रहीं शुरुआत में परिवार और स्थानीय लोगों तक ही उत्पादों की बिक्री होती थी। बाद में मंदिरों से भी ऑर्डर मिलने लगे। सुमित्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को उनके समूह ने नगर निगम को 11 हजार गोबर के दीयों की आपूर्ति की थी। इसके बाद उनके उत्पादों की मांग दूसरे शहरों से भी आने लगी। सुमित्रा बताती हैं कि दीपावली के अवसर पर हाल ही में अयोध्या से गोबर के दीयों का बड़ा ऑर्डर मिला है।

समूह की महिलाओं को त्योहारों के सीजन में सबसे ज्यादा काम मिलता है। इस दौरान महीने में 4 से 5 हजार रुपए तक की बचत होती है। वहीं सामान्य दिनों में भी प्रत्येक महिला महीने में करीब 3 से 5 हजार रुपए तक की कमाई कर लेती है। इसके साथ ही समूह की महिलाएं मिलेट्स से तैयार बिस्किट और कुकीज की सप्लाई भी कर रही हैं। इस तरह स्थानीय स्तर से शुरू हुआ उनका काम अब दूसरे शहरों तक पहुंच रहा है और महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन रहा है। सुमित्रा और उसके समूह ने आज 1 नवंबर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह में कल्चरल स्ट्रीट पर स्टॉल लगाया था।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।