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जैसलमेर में रेगिस्तानी लोमड़ी ने किया गोडावण का शिकार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 21 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
जैसलमेर में रेगिस्तानी लोमड़ी ने किया गोडावण का शिकार

जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट बस्टर्ड के तहत जंगल में छोड़े गए छह माह के नर गोडावण का रेगिस्तानी लोमड़ी ने शिकार कर लिया। 17 अक्टूबर को सुदासरी रिलीज साइट से छोड़े गए गोडावण की मौत का पता सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए चला। DCF चंद्रपाल सिंह चौहान और ACF अशोक सिंह ने घटना की पुष्टि की है। वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीमें गोडावण की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाने और शिकारी जीवों से बचाव के उपायों पर काम कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, शेष तीन गोडावण सुरक्षित हैं और उनकी GPS से निगरानी की जा रही है।

जैसलमेर, 21 अक्टूबर। जैसलमेर में अति-संकटग्रस्त गोडावण के संरक्षण अभियान को झटका लगा है। डेजर्ट नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट बस्टर्ड के तहत जंगल में छोड़े गए छह माह के एक नर गोडावण का रेगिस्तानी लोमड़ी ने शिकार कर लिया। 17 अक्टूबर को सुदासरी रिलीज साइट से छोड़े गए इस गोडावण की मौत का खुलासा सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए हुआ।

DCF चंद्रपाल सिंह चौहान और ACF अशोक सिंह ने घटना की पुष्टि की है। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण के प्राकृतिक पुनर्वास की चुनौतियां एक बार फिर सामने आई हैं। प्रोजेक्ट बस्टर्ड के तहत कैप्टिव ब्रीडिंग के बाद जंगल में छोड़े गए छह माह के नर गोडावण का प्राकृतिक जल स्रोत यानी गजलर पर पानी पीते समय रेगिस्तानी लोमड़ी ने शिकार कर लिया।

यह गोडावण 17 अक्टूबर को सुदासरी रिलीज साइट से छोड़ा गया था। सैटेलाइट ट्रैकिंग उपकरण से घटना का पता चलने के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान यानी WII के वैज्ञानिक और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वहां पक्षी के पंख, अवशेष और ट्रैकिंग डिवाइस बरामद हुए। DCF चंद्रपाल सिंह चौहान के अनुसार, कैप्टिव ब्रीडिंग के बाद जंगल में छोड़े गए पक्षियों का प्राकृतिक शिकार होना वन्यजीव पुनर्वास की प्रक्रिया में सामने आने वाली चुनौती है।

उन्होंने बताया कि वन विभाग और WII की टीम गोडावण की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। उनके अनुसार, शेष तीन गोडावण सुरक्षित हैं और GPS के जरिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। ACF अशोक सिंह ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि गोडावण की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ाई जा रही है और क्षेत्र में निगरानी मजबूत की जा रही है।

साथ ही, शिकारी जीवों से बचाव के उपायों पर काम किया जा रहा है। गोडावण दुनिया के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है और इसके संरक्षण के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग के साथ प्राकृतिक आवास में पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में यह घटना वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार, शिकारी जीवों से सुरक्षा और जंगल में छोड़े गए पक्षियों की निगरानी से जुड़ी चुनौतियों को उजागर करती है।

अब शेष गोडावण की सुरक्षा और उनके सफल पुनर्वास पर वन विभाग तथा वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी बनी हुई है।

बाइट-1: चंद्रपाल सिंह, DCF, DNP बाइट-2: अशोक सिंह, ACF, DNP

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।