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'जलभराव-टूटी सड़कों का ठीकरा मेरे सिर क्यों फोड़ा':महापौर बोलीं-नगर आयुक्त गंगाजल उठाकर कह दें,बागी पार्षदों के यहां काम रोकने को कहा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
'जलभराव-टूटी सड़कों का ठीकरा मेरे सिर क्यों फोड़ा':महापौर बोलीं-नगर आयुक्त गंगाजल उठाकर कह दें,बागी पार्षदों के यहां काम रोकने को कहा

बेनाझावर के ब्रजेंद्र स्वरूप पार्क स्थित मंगल भवन की कमेटी भंग किए जाने के फैसले को लेकर नगर निगम में एक बार फिर महापौर और नगर आयुक्त के बीच टकराव सामने आया है। महापौर प्रमिला पांडेय ने नगर आयुक्त के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कमेटी को नगर निगम की कार्यकारिणी और सदन की स्वीकृति के बिना भंग किया गया है।

उन्होंने इसे गलत बताते हुए शासन से शिकायत करने की बात कही। महापौर ने सड़कों के गड्ढों, जलभराव, 312 तालाबों की स्थिति और बागी पार्षदों के आरोपों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर मामले में अकेले मेयर को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और अब उनसे जवाब मांगा जाएगा।

मंगल भवन का हर काम कानूनी सलाह से हुआ- महापौर महापौर प्रमिला पांडेय ने मंगल भवन की कमेटी भंग किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम की कार्यकारिणी और सदन की मंजूरी के बिना कमेटी को निरस्त किया गया। उन्होंने कहा कि मंगल भवन में अब तक करीब 100 शादियां हो चुकी हैं। इसके निर्माण और संचालन से जुड़े कामों में नियमों की अनदेखी नहीं की गई।

हर काम के लिए कानूनी सलाह ली गई थी। उन्होंने बताया कि कमेटी को भंग किया जाना उचित नहीं है और वह इस पूरे मामले की शिकायत शासन से करेंगी। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपनी जिम्मेदारी से कोई बच नहीं सकता। उन्होंने कहा कि वह नगर आयुक्त के साथ दोबारा बैठक करेंगी और अधिकारियों से काम करने को कहेंगी।

'नगर आयुक्त ने गड्ढामुक्त सड़क के लिए बजट नहीं मांगा' सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों को लेकर उठ रहे सवालों पर महापौर ने कहा कि नगर निगम में कोई भी काम नगर आयुक्त के हस्ताक्षर के बिना नहीं होता। यहां तक कि एक चपरासी के ट्रांसफर का फैसला भी नगर आयुक्त के स्तर से होता है। 15वें वित्त आयोग की कमेटी की अध्यक्ष होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर नगर आयुक्त शहर में गड्ढामुक्त सड़क कराने के लिए अलग बजट मांगते तो उनको दिया जाता, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।

अफसर खुद नहीं चाहते हैं कि गड्ढे भरे जाएं। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी के पास ऐसा कोई प्रमाण है कि उन्होंने किसी क्षेत्र में काम नहीं कराने को कहा हो, तो सामने लाया जाए। नगर आयुक्त गंगाजल उठाकर कह दें… महापौर ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर तीखे अंदाज में कहा कि नगर आयुक्त या कोई भी अधिकारी गंगाजल उठाकर यह कह दे कि मेयर ने कभी किसी क्षेत्र में काम नहीं कराने के लिए कहा था, तो वह खुद को दोषी मानेंगी।

उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं तो फिर उन्हें दोषी क्यों ठहराया जा रहा है। महापौर ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा और इशारा किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर लिखित कार्रवाई भी की जाएगी। 312 तालाबों के लिए कमेटी बनाए जाने की मांग जलभराव को लेकर महापौर ने मंडलायुक्त और केडीए वीसी से एक विशेष कमेटी बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि शहर के 312 तालाबों को खाली और सुरक्षित कराया जाए, ताकि बरसात का पानी उनमें पहुंचाया जा सके और जलभराव की समस्या को कम किया जा सके। महापौर ने कहा कि जलभराव के लिए अकेले मेयर को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। इस बार अधिक बारिश होने से जलभराव भी ज्यादा हुआ। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने कार्यालयों से निकलते नहीं हैं।

इसलिए सड़कों पर निकलकर स्थिति देखें और जिम्मेदारी निभाएं। महापौर ने यह भी कहा कि जलभराव के समय वह पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कानपुर में नहीं थीं। अब अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखित कार्रवाई की जाएगी। बागी पार्षदों पर महापौर का पलटवार बागी पार्षदों की ओर से क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने के आरोपों पर महापौर ने पलटवार किया।

उन्होंने कहा कि अगर किसी पार्षद के क्षेत्र में काम नहीं हुआ है तो उन्हें सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन पार्षदों के क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य हुए हैं। किसी के क्षेत्र में करीब 9 करोड़, किसी के यहां 10 करोड़ और किसी के क्षेत्र में करीब 5 करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए हैं।

ऐसे में सिर्फ महापौर को विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वह किसी क्षेत्र में काम रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश देती हैं, तो उसे साबित किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना किसी निर्देश के काम नहीं होने के लिए सिर्फ मेयर को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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