जामताड़ा के नारायणपुर गढ़ में राजतंत्र के समय से चली आ रही महाष्टमी पर दंड देने की परंपरा
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
जामताड़ा के नारायणपुर गढ़ में राजतंत्र के समय से चली आ रही महाष्टमी पर दंड देने की परंपरा, महतो तालाब से मां दुर्गा के दरबार तक श्रद्धालुओं ने की दंडवत यात्रा, सदियों पुरानी परंपरा पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास, मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचे भक्त।
Short Headline: जामताड़ा के नारायणपुर गढ़ में राजतंत्र के समय से चली आ रही महाष्टमी पर दंड देने की परंपरा
दंड परंपरा, जामताड़ा, उज्ज्वल
जामताड़ा के नारायणपुर गढ़ में दंड देने की परंपरा
महतो तालाब से मां दुर्गा के दरबार तक दंडवत यात्रा
सदियों पुरानी परंपरा पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास
मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचे भक्त
एंकर जामताड़ा जिले के नारायणपुर गढ़ में दुर्गा पूजा की एक अनोखी परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। महाष्टमी के दिन श्रद्धालु महतो तालाब में स्नान कर जमीन पर लेटकर दंड देते हुए मां दुर्गा के दरबार पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत मां दुर्गा अवश्य पूरी करती हैं। आस्था और विश्वास से जुड़ी यह परंपरा आज भी लोगों को आकर्षित कर रही है।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. महाष्टमी की सुबह पांच बजे से ही जामताड़ा के नारायणपुर गढ़ में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। महतो तालाब में पवित्र स्नान के बाद भक्तों ने जमीन पर लेटकर दंड दिया और करीब आधा किलोमीटर की दूरी तय कर मां दुर्गा के दरबार में पूजा-अर्चना की। पुजारी विजय पाठक ने बताया कि भक्त संतान प्राप्ति, रोग से मुक्ति और मनोकामना पूरी होने की कामना लेकर दंड देते हैं।
बाइट- विजय पाठक, मंदिर के पुजारी
वीओ 02. नारायणपुर गढ़ में दंड देने की यह परंपरा राजतंत्र के समय से चली आ रही है। पहले गढ़ के राजा भी इस परंपरा में शामिल होते थे और आज उनके वंशज इसे आगे बढ़ा रहे हैं। समय के साथ पीढ़ियां बदलीं, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास कायम है। महाष्टमी के अवसर पर इस परंपरा में शामिल होकर भक्तों ने श्रद्धा अर्पित की और परिवार के खुशहाली की कामना की।
बाइट- आनंद पोद्दार, श्रद्धालु
अंतिम वीओ यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सहेज रही है। महाष्टमी के दिन दंड देते हुए मां के दरबार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा विश्वास, समर्पण और भक्ति की ऐसी मिसाल है, जो आज भी लोगों को मां दुर्गा की आराधना से जोड़ रही है।
जामताड़ा से उज्ज्वल प्रसाद आजाद की रिपोर्ट।