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जिस जमीन पर 17 करोड़ का लोन,उसकी मुफ्त रजिस्ट्री क्यों?:2,102 हितग्राही बैंकों से 175 करोड़ का कर्ज ले चुके; सरकार ₹3,800 करोड़ खर्च करेगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
जिस जमीन पर 17 करोड़ का लोन,उसकी मुफ्त रजिस्ट्री क्यों?:2,102 हितग्राही बैंकों से 175 करोड़ का कर्ज ले चुके; सरकार ₹3,800 करोड़ खर्च करेगी

मध्यप्रदेश में 50 लाख लोगों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री के लिए सरकार 3,800 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है। सरकार का तर्क है कि इससे लोगों को बैंक लोन मिल सकेगा, लेकिन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख पाने वाले 2,102 हितग्राही पहले ही बैंकों से कुल 175 करोड़ 57 लाख 8 हजार 919 रुपए का कर्ज ले चुके हैं।

इनमें कुछ भूखंडों पर करोड़ों रुपए का लोन दर्ज है। बैंकों ने ये लोन राज्य सरकार के चार साल पुराने आदेश के आधार पर दिए हैं। इस आदेश में भूमि का अधिकार पत्र जारी होने पर बैंक लोन देने की मंजूरी दी गई थी। हितग्राहियों को पहले ही कर्ज दिए जाने की जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब सरकार पटवारियों के खिलाफ बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई कर रही है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि राज्य भू-अभिलेख मुख्यालय में आबादी भूमि पर दिए गए बैंक लोन का रिकॉर्ड मौजूद है। बैंकों ने ये लोन राज्य सरकार के चार साल पुराने आदेश के आधार पर दिए हैं। इस आदेश में भूमि का अधिकार पत्र जारी होने पर बैंक लोन देने की मंजूरी दी गई थी। कर्ज देने के बाद बैंकों ने संबंधित भूखंडों को बंधक बनाया और इसकी एंट्री राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज की।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब हितग्राहियों के नाम पर मालिकाना हक दर्ज है और भूखंड बैंकों के पास बंधक हैं, तो मुफ्त रजिस्ट्री के लिए नई व्यवस्था की जरूरत क्यों है। इसी व्यवस्था में पटवारियों को निष्पादक (एक्जीक्यूटर) की भूमिका दिए जाने पर विवाद हुआ था। पटवारी अपनी व्यक्तिगत आईडी और भूमिका को लेकर कानूनी व व्यावहारिक सवाल उठाते हुए इसका विरोध कर रहे थे।

शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ.

मोहन यादव से मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने सोमवार से स्वामित्व योजना का काम शुरू करने का ऐलान किया है। सरकार ने रजिस्ट्रियों के लिए पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने के प्रावधान किए हैं। साथ ही 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति बनी है। पटवारियों की वेतन विसंगति और अन्य आर्थिक मांगों पर विचार के लिए मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को होने वाले महासम्मेलन में घोषणा का आश्वासन दिया है।

स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में करीब 50 लाख लोगों की भूमि की रजिस्ट्री का लक्ष्य है। तीन साल में बैंकों ने बांटा लोन आबादी भूमि पर रहने वाले लोगों को स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख दिए जाने के बाद तत्कालीन भू-अभिलेख आयुक्त श्रीमन शुक्ला ने 13 अप्रैल 2022 को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के कोऑर्डिनेटर को पत्र लिखा था।

इसमें बताया गया था कि आबादी भूमि को बंधक रखने और बंधक हटाने की प्रक्रिया कृषि भूमि के खसरे को बंधक रखने जैसी होगी। पत्र के अनुसार, यदि कोई हितग्राही बैंक से कर्ज लेने के बाद उसे नहीं चुकाता है, तो बैंक को संबंधित संपत्ति पर कब्जा लेने और उसे बेचने का अधिकार होगा। हालांकि, सरफेसी एक्ट के मामलों में विभाग की ओर से कार्रवाई की अनुमति नहीं दी गई थी।

इसी पत्र के आधार पर पिछले तीन वर्षों में बैंकों ने आबादी भूमि पर कर्ज देने की प्रक्रिया अपनाई। मुफ्त रजिस्ट्री पर 3,800 करोड़ रुपए खर्च होंगे मोहन यादव कैबिनेट ने आबादी भूमि पर काबिज करीब 50 लाख लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री की सुविधा देने के लिए छह महीने पहले 3,800 करोड़ रुपए के खर्च को मंजूरी दी थी।

इस काम के लिए पंजीयन विभाग के सब-रजिस्ट्रार के अलावा पंचायत समन्वय अधिकारी, कृषि विकास विस्तार अधिकारी, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार को भी सब-रजिस्ट्रार के अधिकार दिए गए हैं। सरकार ने यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू कर एक महीने में पूरी करने की समयसीमा तय की थी।

हालांकि, पटवारियों के विरोध के चलते अब तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। आबादी भूमि पर सबसे ज्यादा लोन लेने वाले हितग्राही राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे अधिक कर्ज दर्ज वाले हितग्राहियों में रतलाम जिले की जावरा तहसील के टोलखेड़ी निवासी संजय का नाम है। उनके भूखंड क्रमांक 12 पर 16 करोड़ 89 लाख 14 हजार 368 रुपए का लोन दर्ज है।

खरगोन जिले की खरगोन नगर तहसील के धनोरा निवासी लक्ष्मीबाई, हेमंत और हेमंत शंकर के भूखंड क्रमांक 47 पर 16 करोड़ 81 लाख 53 हजार 684 रुपए का लोन दर्ज है। अन्य बड़े कर्ज वाले हितग्राहियों में विदिशा जिले के गूलरखेड़ी निवासी आकाश कटारे के भूखंड पर 96 लाख रुपए, देवास जिले के डबलचौकी निवासी सुरेश अग्रवाल के भूखंड पर 52.20 लाख रुपए और पांढुर्णा जिले के रिधोरा निवासी प्रेमराज लांडे व संगीता लांडे के भूखंड पर 43 लाख रुपए का लोन दर्ज है।

पांढुर्णा जिले के रिधोरा निवासी अशोक लोनकर और सरस्वती लोनकर के भूखंड पर 42.90 लाख रुपए, उज्जैन जिले के मालीखेड़ी निवासी जावेद मोहम्मद कुरैशी, सुलताना बी और हारून मोहम्मद के भूखंड पर 35 लाख रुपए और झाबुआ जिले के मदरानी निवासी गणपतलाल गारी और जमुनाबाई के भूखंड पर भी 35 लाख रुपए का लोन दर्ज है।

विदिशा जिले के अमराई निवासी सलीम खां के भूखंड पर 33.40 लाख रुपए और इंदौर जिले के जलोदकेऊ निवासी राजकरण परमार व रोहित के भूखंड पर 30 लाख रुपए का लोन दर्ज है। इंदौर समेत कई जिलों में 20 लाख रुपए या उससे अधिक का लोन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में इंदौर, उज्जैन, खरगोन, देवास, नीमच, रतलाम, मंदसौर, विदिशा, शाजापुर, सीहोर, हरदा, कटनी, खंडवा, बुरहानपुर, झाबुआ, नर्मदापुरम और दतिया समेत कई जिलों के हितग्राहियों के भूखंडों पर 20 लाख रुपए या उससे अधिक के लोन दर्ज हैं।

इनमें इंदौर जिले के केलोद निवासी नारायण कामदार के भूखंड पर 22 लाख रुपए, दतोदा निवासी रोहत के भूखंड पर 25 लाख रुपए और देपालपुर क्षेत्र की गिरोड़ा निवासी सपना बाई व प्रेमसिंह मौर्य के भूखंडों पर 23-23 लाख रुपए का लोन दर्ज है। उज्जैन जिले के कायथा निवासी लीला बाई के भूखंड पर 25 लाख रुपए, बड़नगर क्षेत्र के पलवा निवासी जगदीश यादव के भूखंड पर 22.50 लाख रुपए और चंदसेरी निवासी बहादुर बागवान के भूखंड पर 20.10 लाख रुपए का लोन दर्ज है।

अन्य जिलों में कटनी के स्लीमनाबाद निवासी तपन कुमार राय के भूखंड पर 30 लाख रुपए, खंडवा के बोरेगांव बुजुर्ग निवासी पंकज गंगरादे के भूखंड पर 30 लाख रुपए तथा देवास जिले के तिवड़िया निवासी मुकेश के भूखंड पर 25 लाख रुपए का लोन दर्ज है। इस रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर अधिकार अभिलेख मिलने के बाद कई हितग्राही बैंक ऋण की सुविधा का लाभ ले चुके हैं।

ऐसे में मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका और पहले से बंधक भूखंडों के पंजीयन को लेकर उठ रहे सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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