जन-केंद्रित विकास के लिए संसदीय कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग महत्वपूर्ण: अनुराग सिंह ठाकुर
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के अवसर पर उपराष्ट्रपति द्वारा संविधान सदन में आयोजित विशेष भोज में शामिल हुए अनुराग सिंह ठाकुर
अक्तूबर 27, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश): पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर आज संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन में भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा आयोजित विशेष भोज में शामिल हुए। यह आयोजन 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के अवसर पर किया गया, जिसमें ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के सांसदों, विधायी संस्थाओं के प्रमुखों और विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
इस मंच की मुख्य विषयवस्तु ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों की भूमिका को सशक्त बनाना’ रही। मंच की चर्चाओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच वैश्विक दृष्टिकोण साझा करने, विधायी कार्यप्रणालियों के बेहतर अनुभवों का आदान-प्रदान करने और साझा विकास प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि संसदीय कूटनीति आपसी विश्वास मजबूत करने, बहुपक्षीय साझेदारी को गहरा बनाने और शासन व्यवस्था को टिकाऊ, समावेशी तथा जन-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अनुराग सिंह ठाकुर ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के सफल आयोजन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व की सराहना की।
उन्होंने विभिन्न विधानसभाओं और विधायी संस्थाओं के पीठासीन अधिकारियों के योगदान की भी प्रशंसा की। इनमें हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे शामिल रहे। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में संसदीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी सराहना की।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि साझा वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न देशों की संसदों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक है। ब्रिक्स देशों और उनके साझेदार देशों के बीच मजबूत विधायी सहयोग से लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलेंगे।
उन्होंने समावेशी विकास, संस्थागत सहयोग और जनहित को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।