जनजाति विभाग के अतिथि शिक्षकों की राखी - भुजलिया रहेगी सूखी, बहनों को क्या देंगे उपहार?: संतोष कहार
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रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व में नही दिया मानदेय अतिथि शिक्षक मायूस
भोपाल:-आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव - श्री सन्तोष कहार ने बताया कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में अतिथि शिक्षक जुलाई माह 2026 से अपनी सेवा पूर्ण निष्ठा, लगन व ईमानदारी के साथ निरंतर देते आ रहे है किंतु जनजाति कल्याण विभाग के आला अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते राखी - भुजलिया (रक्षाबंधन) जैसे पावन पर्व में भी अतिथि शिक्षकों को आज दिनाँक तक मानदेय नही दिया गया है। जबकि जनजाति कल्याण विभाग के अतिथि शिक्षकों को छोड़कर शिक्षा विभाग में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को मानदेय दे दिया गया है।
इसलिये श्री सन्तोष कहार ने जनजाति कल्याण विभाग मध्यप्रदेश के संबंधित आला अधिकारियों से निवेदन किया है कि राखी - भुजलिया (रक्षाबंधन) जैसे पवन पर्व में इस तरह का अन्याय पूर्ण और सौतेला व्यवहार, अत्याचार व शोषण बंद करने हेतु निवेदन किया है। और बजट मिलने के पूर्व ही समयानुसार - नियमानुसार उचित कार्यवाही पूर्ण कर रखी जाये और बजट आते ही उचित कार्यवाही कर समय पर मानदेय दिया जाये।
ताकि रक्षाबंधन जैसे पावन त्यौहारों के पूर्व जनजाति कल्याण विभाग के अतिथि शिक्षकों को मानदेय दिया जा सके। और भविष्य में इस तरह का कृत्य जनजाति कल्याण विभाग के अतिथि शिक्षकों के साथ न किया जाये ऐसा निवेदन संबंधित आला अधिकारियों से किया है।
जनजाति कल्याण विभाग के आला अधिकारियों की कुंभकर्णीय निद्रा और घोर लापरवाही के चलते आज दिनाँक तक अतिथि शिक्षकों को मानदेय नही मिलना घोर लापरवाही का प्रतीक है। उक्त कारण से जनजाति कल्याण विभाग के अतिथि शिक्षकों के परिवारों की राखी - भुजलिया सूखी रहेगी। जिसकी वजह से अतिथि शिक्षक और उनके परिवारों में मायूसी माहौल बना है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
अतिथि शिक्षकों की सेवा पर जनजाति कल्याण विभाग की लापरवाही से रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उनके योगदान को मान्यता नहीं मिली, जिससे वे निराश हुए। यह विषय अतिथि शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके कार्य के लिए उचित मानदेय के अभाव को उजागर करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि अतिथि शिक्षक शासकीय विद्यालयों में गुणवत्ता शिक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं, और उनका मनोबल घटने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि शैक्षिक सेवाओं में कमी आएगी और ग्रामीण व जनज