जेल निरीक्षण के दौरान चबूतरे का उद्घाटन, बंदियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र
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जेल निरीक्षण के दौरान चबूतरे का उद्घाटन, बंदियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र
जिला जज आशुतोष कुमार झा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राहुल किशोर ने जेल का निरीक्षण किया।
29 अगस्त , नवादा (नवादा, बिहार) : जिला जज आशुतोष कुमार झा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राहुल किशोर ने जेल का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने जेल में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, भोजन व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जेल में बंदियों के बीच भोजन वितरण के लिए नवनिर्मित चबूतरे का उद्घाटन किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से बंदियों के बीच भोजन वितरण की व्यवस्था को और सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर आरसेटी (RSETI) की ओर से जेल में बंदियों को दिए गए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बंदियों को प्रमाणपत्र देकर उनके कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
वहीं, जेल में रहकर मैट्रिक की परीक्षा देने वाले बंदियों को भी उनके अंकपत्र और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने कहा कि बंदियों को शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ना उनके पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जीने और रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल प्रशासन को बंदियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने तथा भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
इस पहल का उद्देश्य बंदियों के बीच शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि वे जेल से बाहर आने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर जीवन की शुरुआत कर सकें।
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Caption: जिला जज आशुतोष कुमार झा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राहुल किशोर ने जेल का निरीक्षण किया।
🎙️ जनता का संदेश का मत
जेल निरीक्षण के दौरान चबूतरे का उद्घाटन और बंदियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र देने की पहल से हमें यह सिखने को मिलता है कि अपराध के बाद भी पुनर्वास और शिक्षा से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। यह कदम दिखाता है कि न्याय व्यवस्था केवल दंड नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण का भी माध्यम है। समाज को चाहिए कि हम ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दें, ताकि हर व्यक्ति को नया सवेरा मिल सके और हम सभी मिलकर एक समावेशी, करुणामय समाज बना सकें।