जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस ले लिया है
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रायपुर, 8 अक्टूबर 2026
वस्तु और सेवा कर-जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस ले लिया है। परिषद ने अभियोजन की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी है। जुर्माने और कारावास की सजा का निर्णय सक्षम अदालत के विवेक पर छोड़ दिया गया है। कर फाइलिंग में देरी, गलती या भुगतान करने में विलंब करने वाले करदाता को वसूली, ब्याज और आनुपातिक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
नई दिल्ली में आज जीएसटी परिषद की बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दर संरचना तय हो चुकी है। उन्होंने कहा कि परिषद ने नोटिस और कार्यवाही के लिए सामान्य मानकों की सिफारिश की है। वित्त मंत्री ने कहा कि दस हजार रुपये की निर्धारित मौद्रिक सीमा से कम के नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे और दस हजार रुपये से कम के लंबित नोटिसों को वापस लिया जाएगा।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस ले लिया है और अभियोजन सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पाँच करोड़ रुपये कर दी है। यह कदम कर प्रशासन की शक्ति को सीमित कर, न्यायिक विवेक पर जुर्माने और कारावास का निर्णय छोड़ता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कर फाइलिंग में देरी या भुगतान में त्रुटि करने वाले करदाताओं को वसूली, ब्याज और आनुपातिक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा, पर गिरफ्तारी की धमकी घटेगी। आम जनता पर इसका असर यह होगा कि कर नियमों का पालन करने वाले लोगों के लिए कानूनी जोखिम कम हो
🎙️ जनता का संदेश का मत
कर नियमों में बदलाव से करदाता पर दायित्व बढ़ेगा, पर यह हमें याद दिलाता है कि समय पर फाइलिंग और सही भुगतान से न केवल कानूनी परेशानी से बचा जा सकता है, बल्कि समाज में विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ती है। जब कोई गलती हो, तो उसे सुधारने का रास्ता है—अदालत, न कि हिंसा। हमें अपने कर्तव्यों को निभाकर समाज को जिम्मेदार नागरिकों की ओर अग्रसर करना चाहिए।