राजनीति

जीते तो $5000 देंगे...ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या वोट खरीदने की सीधी कोशिश? कहां फंस सकता है कानूनी पेंच

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
जीते तो $5000 देंगे...ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या वोट खरीदने की सीधी कोशिश? कहां फंस सकता है कानूनी पेंच

ट्रंप ने ऐलान किया कि अगर नवंबर के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) में जीत हासिल करती है, तो हर बालिग अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर (लगभग 4 लाख रुपये से अधिक) की रकम दी जाएगी। पैसे देने के बदले चुनाव जीतने की यह शर्त काफी असामान्य मानी जा रही है, और यह साफ नहीं है कि इस योजना को कैसे लागू किया जाएगा।

डेमोक्रेट्स ने इस प्रस्ताव को "खोखला वादा" बताया है, साथ ही इस बात पर भी सवाल उठाए गए हैं कि क्या यह योजना अमेरिका के चुनाव कानूनों का उल्लंघन कर सकती है। अमेरिका में लगभग 27 करोड़ वयस्क हैं। उनमें से हर एक को $5,000 का भुगतान करने पर सरकार को लगभग $1.3 ट्रिलियन का खर्च आएगा। इसे लागू करने के लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी लेनी होगी।

इससे पहले भी संसद ने परिवारों को 2,000 डॉलर देने के उनके पिछले प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। क्या ट्रंप का $5,000 देने का वादा गैरकानूनी हो सकता है?

इस सवाल पर कानूनी जानकारों के बीच बहस छिड़ गई है। गैरकानूनी होने का तर्क (वोट खरीदने का आरोप): अमेरिकी संघीय कानून (Federal Law) के मुताबिक, वोट पाने या चुनावी नतीजे को प्रभावित करने के लिए पैसे की पेशकश करना पूरी तरह गैरकानूनी है। चूंकि ट्रंप ने इस $5,000 के भुगतान को सीधे तौर पर रिपब्लिकन पार्टी की जीत से जोड़ा है (कि दोनों सदन जीतने पर ही पैसा मिलेगा), इसलिए कुछ लोग इसे वोटरों को पैसे का लालच देना मान रहे हैं।

बचाव में पहला तर्क टैक्स छूट का वादा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सीधे तौर पर रिश्वत या अवैध भुगतान नहीं कहा जा सकता। इसे टैक्स में छूट (Tax Cut) या आर्थिक राहत योजना के चुनावी वादे के रूप में भी देखा जा सकता है, और चुनाव में ऐसी नीतियां पेश करना कानूनी रूप से मान्य होता है।

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' से बात करते हुए एक चुनाव कानून विशेषज्ञ ने बताया कि ट्रंप के इस बयान को अमेरिकी संविधान के 'पहले संशोधन' (First Amendment) के तहत मिले बोलने की आज़ादी (Free Speech) के अधिकार का संरक्षण भी मिल सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, एक पक्ष इसे "वोट के बदले पैसे का वादा" मानकर गैरकानूनी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे "चुनावी नीति और बोलने की आज़ादी" के दायरे में वैध ठहरा रहा है।

इसे भी पढ़ें: US Department of Homeland Security के ‘Mr Singh’ विज्ञापन पर विवाद, भड़के सिख और हिंदू संगठन ये ट्रंप डिविडेंड क्या है एक और मुद्दा यह है कि कांग्रेस इन पेमेंट के लिए फंड कैसे देगी और उन्हें मंज़ूरी कैसे देगी। अमेरिका में फ़ेडरल खर्च पर कांग्रेस का कंट्रोल होता है, लेकिन ट्रंप ने अपने भाषण में यह नहीं बताया कि क्या वह इस प्रस्ताव के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी लेंगे।

ट्रंप ने प्रस्तावित पेमेंट को "ट्रंप डिविडेंड" कहा। ट्रंप ने कहा अगर रिपब्लिकन पार्टी 'हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स' और 'यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट' - यानी दोनों - में जीतती है, तो मैं अमेरिका के हर बालिग़ नागरिक को 5,000 डॉलर का डिविडेंड (हिस्सा) दूंगा। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि आप पैसे खर्च करने के लिए कनाडा जाएं।

हम नहीं चाहते कि आप चीन या जर्मनी जाएं। आपको अमेरिका में ही पैसे खर्च करने होंगे। यह साफ़ नहीं है कि सरकार इस बात पर कैसे नज़र रखेगी कि पैसे कहाँ खर्च किए जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: US Midterm Election: क्या सीनेट पर दोबारा नियंत्रण पा सकेंगे डेमोक्रेट्स?

ट्रंप की घटती लोकप्रियता के बीच कड़ा मुकाबला पहले भी ट्रंप कर चुके हैं इस तरह के वादे $5,000 का यह प्रस्ताव पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने अमेरिकियों को सीधे भुगतान करने का विचार रखा है। इससे पहले भी उन्होंने टैरिफ से होने वाली कमाई से $2,000 के चेक देने का प्रस्ताव दिया था। अमेरिका के दूसरे नेताओं ने भी पहले चुनाव से जुड़े आर्थिक वादे किए हैं।

कोविड-19 महामारी के दौरान, जॉर्जिया में डेमोक्रेट्स ने वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सीनेट पर कब्ज़ा कर लेती है, तो वे $2,000 की राहत राशि देंगे। ट्रंप का यह नया प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं और अमेरिका-ईरान युद्ध का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी पड़ रहा है।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।