जोशीमठ हेलीकॉप्टर क्रैश: खराब मौसम के बाद भी भरी उड़ान? जानें क्या हैं एविएशन के नियम
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उत्तराखंड के जोशीमठ में बद्रीनाथ धाम से लौटे रहे हेलीकॉप्टर क्रैश मामले में DGCA ने कड़ा रुख अपनाया है और ट्रांस-भारत एविएशन एयरलाइंस की पूरी फ्लीट को ग्राउंड कर दिया गया है.
हालांकि, क्रैश का कारण अभी साफ नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि खराब मौसम इसका कारण हो सकता है.
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर खराब मौसम के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ाने का निर्देश किसने दिया था?
जिसके चलते पायलट हिमांशु सब्बरवाल सहित 6 तीर्थ यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.
जबकि, खराब मौसम को लेकर सिविल एविएशन मंत्रालय और उत्तराखंड विमानन अथॉरिटी की साफ गाइडलाइंस हैं.
दुर्घटना के दौरान हो रही भारी बर्फबारी
जोशीमठ की इस घाटी में क्रैश हुए ट्रांस भारत एविएशन एयरलाइंस के हेलीकॉप्टर के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बनाए गए वीडियो से साफ दिखाई पड़ता है कि उस वक्त जमकर बर्फबारी हो रही थी.
साफ है कि जब दोपहर 1.14 बजे पर ये हेलीकॉप्टर VT-HCX के दौरान जब इस हेलीकॉप्टर ने बद्रीनाथ धाम से पांच यात्रियों के साथ उड़ान भरी, तो ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब था. इसके बावजूद, हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी.
पिछले साल यानी 2025 में चारधाम यात्रा से जुड़े एक प्राइवेट एयरलाइंस के हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद DGCA ने पहाड़ों में उड़ान की समीक्षा करते हुए चार्टर हेलीकॉप्टर से जुड़े सख्त रूल्स एंड रेगुलेशन जारी किए थे.
इसके तहत देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपैड और केदारनाथ के करीब कंट्रोल रूम में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ऑफिसर और एक IMD के अधिकारी की तैनाती की गई थी, ताकि खराब मौसम की जानकारी पायलट और एयरलाइंस से साझा की जा सके.
किन-किन परिस्थितियों में विमान उड़ाने की अनुमति नहीं?
DGCA के नियमों के मुताबिक, साफ मौसम में विजिबिलिटी कम से कम पांच किलोमीटर होनी चाहिए.
अगर धुंध के कारण विजिबिलिटी 2-5 किलोमीटर होती है, तो फ्लाइट को मौसम साफ होने का इंतजार करना चाहिए, फिर चाहे इसके लिए फ्लाइट में देरी हो जाए. अगर विजिबिलिटी 2 किलोमीटर से कम है, तो फ्लाइट को
📡 स्रोत: ABP Live