कभी हाथों में थी AK-47, अब कलम से लिख रहे नई इबारत, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पास की 10वीं की परीक्षा
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राजनांदगांव: कभी AK-47 जैसे हथियारों के जरिए दहशत फैलाने वाले हाथों में आज कलम है। ये कलम अब उनके जीवन में बदलाव और नई शुरुआत की कहानी लिख रही है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में आत्मसमर्पित नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा के जरिए समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में जिले के सात से आठ आत्मसमर्पित नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की 10वीं की परीक्षा पास कर सफलता हासिल की है।
वर्ष 2015-16 के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कई नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था। अब पुनर्वास के साथ उन्हें शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बताया कि नक्सल पुनर्वास कार्यक्रम के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जरूरी संसाधन और पढ़ाई का अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्हें कॉपी, किताब, कलम सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री निशुल्क दी गई, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और भविष्य में आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर सकें।
बाइट – अंकिता शर्मा, पुलिस अधीक्षक
आत्मसमर्पित नक्सली छोटू पद्दा बताते हैं कि नक्सली संगठन से प्रभावित होकर वर्ष 2002 में वे संगठन में शामिल हो गए थे। वर्ष 2012 में केंद्र और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सली संगठन से जुड़ने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। वे चौथी कक्षा तक पढ़े थे, लेकिन शिक्षा हासिल करने का उनका सपना अधूरा रह गया था। अब शासन की मदद से उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से 10वीं की परीक्षा पास कर ली है।
बाइट – छोटू पद्दा, आत्मसमर्पित नक्सली
इसी तरह आत्मसमर्पित नक्सली एकता उसेंडी के लिए भी दोबारा पढ़ाई शुरू करना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से 10वीं की परीक्षा पास की। उनकी सफलता बताती है कि अनुकूल अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति से शिक्षा के जरिए नई शुरुआत की जा सकती है।
बाइट – एकता उसेंडी, आत्मसमर्पित नक्सली
आत्मसमर्पित नक्सली अमृत दुग्गा का कहना है कि अशिक्षित होने के कारण वे नक्सली संगठन में शामिल हो गए थे। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने पढ़ाई शुरू की और अब 10वीं की परीक्षा पास कर ली है। वर्तमान में वे पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
बाइट – अमृत दुग्गा, आत्मसमर्पित नक्सली
शिक्षा के जरिए बदलाव की यह पहल आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 10वीं की परीक्षा पास करने वाले ये सभी आत्मसमर्पित नक्सली राजनांदगांव और मोहला-मानपुर क्षेत्र के पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। कभी हिंसा के रास्ते पर चलने वाले इन लोगों का शिक्षा और रोजगार से जुड़ना पुनर्वास की दिशा में एक नई उम्मीद जगाता है।