कभी रामलीला में सीता बनती थीं ‘मिर्जापुर’ की डिम्पी, याद आई बचपन की यादें
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'मिर्जापुर' में डिम्पी पंडित का बेहतरीन किरदार निभाने वाली हर्षिता गौर के लिए दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि बचपन से जुडी खूबसूरत यादों का भाव है.
दिल्ली में दशहरा की रौनक , मस्ती और हर जगह बड़े बड़े रावण के पुतले और परिवार के साथ त्यौहार मानाने के पल हर्षिता के दिल के बहुत करीब है.
हर्षिता अपने बचपन को याद करते हुए बताया की वह भी दशहरे पर स्कूल या सोसायटी के मैदान में होने वाले नाटकों में सीता का किरदार निभाया करती थी. उन्होंने कहा 'वे यादें आज भी मेरे साथ हैं.
परिवार के साथ बाहर जाना, जश्न का हिस्सा बनना और सबके साथ मिलकर त्योहार मनाना, इन सब चीजों ने दशहरे को मेरे लिए खास बनाया.
हर्षिता ने IANS से बातचीत में कहा, 'दिल्ली में दशहरे की अपनी अलग ही रौनक होती है, खासकर जब आप इसे बचपन की यादों के साथ देखते हैं.
मुझे याद है कि बड़े-बड़े रावण के पुतलों को लेकर कितना उत्साह रहता था और त्योहार के दौरान पूरा शहर किस तरह जश्न में डूब जाता था.
परिवार के साथ रावण दहन देखने जाना, बड़े-बड़े रावण के पुतले और त्योहार के दौरान पूरे शहर में नजर आने वाला उत्साह उनकी यादों का खास हिस्सा है.'
हर्षिता ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, 'जिंदगी में आगे बढ़ने के बाद भी बचपन के ये पल हमेशा याद रहते हैं.
कई बार साधारण-सी दिखने वाली यादें ही समय के साथ सबसे खास बन जाती हैं.' हर्षिता आगे कहती हैं, 'आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो इन्हीं छोटे-छोटे पलों को सबसे ज्यादा संजोकर रखती हूं.
बचपन की ये यादें उसके बीत जाने के लंबे समय बाद भी आपके साथ रहती हैं.'
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'मिर्जापुर द मूवी' में आई थीं नजर
वर्कफ्रंट की बात करें तो हर्षिता हाल ही में 'मिर्जापुर: द मूवी' में नजर आई थीं.
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📡 स्रोत: ABP Live Film
💡 पृष्ठभूमि (Background)
हर्षिता गौर, जो ‘मिर्जापुर’ में डिम्पी पंडित का किरदार निभाती हैं, दशहरा के दौरान अपने बचपन की यादों को ताज़ा करती हैं। यह विषय रामलीला और दशहरा पर आधारित है, जहाँ उन्होंने सीता के रूप में मंच पर प्रदर्शन किया। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे सांस्कृतिक परंपराएँ कलाकारों के जीवन में गहराई से जुड़ी होती हैं और उनके करियर पर असर डालती हैं। इस तरह के अनुभवों से आम जनता को अपने पारंपरिक त्योहारों की महत्ता और उनमें निहित भावनात्मक मूल्य को पुनः पहचानने का मौका मिलता है, जिससे सांस्कृ