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कैलाश मानसरोवर से 100 KM दूर हिली धरती, तिब्बत में एक ही जगह पर दो बार आया भूकंप

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
कैलाश मानसरोवर से 100 KM दूर हिली धरती, तिब्बत में एक ही जगह पर दो बार आया भूकंप

पश्चिमी तिब्बत में गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को कुछ घंटों के अंदर लगातार दो बार भूकंप आए. खास बात यह है कि दोनों भूकंप का केंद्र लगभग एक ही जगह था.

यह जगह कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील से करीब 100 किलोमीटर दूर है.

हालांकि, भूकंप का केंद्र कैलाश पर्वत के ठीक नीचे या उसके पास नहीं था.

भारत के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी यानी NCS के मुताबिक, अभी तक भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है.

जानकारी के मुताबिक, पहला भूकंप दोपहर 1:46:38 बजे पर आया.

इसकी तीव्रता 5.0 और गहराई करीब 14 किलोमीटर थी. इसके करीब दो घंटे बाद दोपहर 3 बजकर 42 मिनट 30 सेकंड पर दूसरा भूकंप आया. इसकी तीव्रता 3.4 और गहराई करीब 10 किलोमीटर थी.

दूसरे भूकंप का केंद्र 31.472 डिग्री उत्तर और 80.356 डिग्री पूर्व में था. दोनों भूकंप के केंद्र में करीब डेढ़ किलोमीटर का ही अंतर था.

इसलिए दूसरे झटके को पहले भूकंप के बाद आया आफ्टरशॉक यानी बाद का झटका माना जा रहा है.

कैलाश मानसरोवर से कितनी दूर है भूकंप का केंद्र?

भूकंप का केंद्र तिब्बत के नगारी इलाके में जांदा के आसपास बताया जा रहा है. यह जगह कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील से करीब 100 किलोमीटर दूर है.

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन परंपरा में बेहद पवित्र माने जाते हैं. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां यात्रा पर जाते हैं.

फिलहाल, कैलाश मानसरोवर यात्रा या यात्रा मार्ग पर भूकंप से किसी असर की कोई खबर नहीं है.

नेपाल वाले भूकंप से इसका कोई लेना-देना नहीं

कुछ जगह इस भूकंप को नेपाल के पास हुई हाल की घटनाओं से जोड़कर बताया जा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है.

यह भूकंप पश्चिमी तिब्बत में काफी दूर आया है. इसका इलाका लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के करीब पड़ता है. इसे नेपाल वाली घटना से जोड़ना सही

📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

भूकंप की यह घटना कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के लगभग 100 किलोमीटर दूर पश्चिमी तिब्बत में हुई, जहाँ एक ही स्थान पर लगातार दो बार भूकंप आया। यह घटना भूकंपीय गतिविधियों की अनिश्चितता और भूकंप के पैटर्न पर वैज्ञानिक सवाल उठाती है। इसकी महत्ता इसलिए है क्योंकि ऐसी दोहराव वाली भूकंप घटना दुर्लभ है और भूवैज्ञानिकों को भूकंप के पूर्वानुमान में नई चुनौतियाँ देती है। आम जनता के लिए यह चेतावनी है कि क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना हुआ है, जिससे भवन सुरक्षा, आपातकालीन तैयारी और जन जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्

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