कैंसर की दवा की 10 गुना कीमत क्यों वसूल रहे:सुप्रीम कोर्ट बोला- रिटेलर को ₹2700, मरीज को ₹27000 में मिल रही; ये दिनदहाड़े डकैती
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जीवनरक्षक दवाओं, खासकर कैंसर की दवाओं की कीमतों पर गंभीर चिंता जताई। सुनवााई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा- “यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है।” कोर्ट ने रिटेलर कीमत (PTR) और मैक्सिमम रिटेल प्राइज यानी MRP के बीच के मार्जिन पर सवाल उठाए। बेंच ने जरूरी दवाओं की ऐसी कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने पर भी सवाल उठाया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि कुछ दवाएं रिटेलर करीब ₹2,700 में खरीदते हैं। इन्हें मरीजों को ₹27,000 की MRP पर बेचा जाता है। बेंच ने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में महंगी दवाओं का भुगतान होने से सरकारी फंड पर भी बोझ पड़ता है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
याचिका में दवाओं-मेडिकल डिवाइस पर कंट्रोल की मांग कोर्ट में यह सुनवाई अनिवार्य जेनेरिक दवाएं लिखने की मांग वाली याचिका पर हुई। याचिका में नॉन लिस्टेड दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने और मेडिकल डिवाइस की कीमतों पर लिमिट लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने कहा कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत करीब 82% दवाएं लिस्टेड कैटेगरी से बाहर हैं।
ऐसी दवाओं के लिए निर्माता पहले से तय कीमत के दायरे में नहीं आते। अन्य दवाओं की कीमतों में भी अंतर बेंच ने आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में अंतर का भी जिक्र किया। उसने कहा कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा गैर-सूचीबद्ध फॉर्मूलेशन के रूप में बेचे जाने पर काफी महंगी हो सकती है।
इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि खुदरा कीमतों में दिखने वाला बड़ा मार्जिन जरूरी नहीं कि फार्मास्यूटिकल कंपनियों के पास ही रहता हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से उन कीमतों की भी जांच करने का आग्रह किया, जिन पर दवाएं स्टॉकिस्ट और रिटेलर को बेची जाती हैं। केंद्र बोला- हम सस्ती दवाएं देने को तैयार अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि केंद्र सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि सरकार सुधारों के लिए तैयार है और जन औषधि योजना का भी जिक्र किया।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कैंसर की दवाओं की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया, रिटेलर को ₹2700 और मरीज को ₹27000 की कीमतें बताकर ‘दिनदहाड़े डकैती’ की शिकायत की। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दवा की कीमतें स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और समानता को प्रभावित करती हैं। अगर कीमतें नियंत्रित नहीं हुईं, तो आम जनता को जीवनरक्षक दवाएँ सस्ती में नहीं मिल पाएंगी, जिससे स्वास्थ्य असमानता और सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है।