कल्पना मिश्रा की मौत मामले में औषधि निरीक्षक निलंबित, जांच समिति की कार्रवाई के बाद शासन का बड़ा कदम
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भोपाल। रीवा में कल्पना मिश्रा की प्रसव के दौरान हुई मौत के मामले में शासन ने कार्रवाई करते हुए जिला रीवा के औषधि निरीक्षक राजेश्याम बट्टी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश के आयुक्त मनोज पुष्प द्वारा 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश में निलंबन की कार्रवाई की गई है।
आदेश के अनुसार, कल्पना मिश्रा, पति अमित मिश्रा, की प्रसव के दौरान रीवा में हुई मृत्यु के संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, भोपाल द्वारा 26 अगस्त 2026 को गठित जांच समिति की कार्रवाई के क्रम में औषधि निरीक्षक राजेश्याम बट्टी के विरुद्ध यह कदम उठाया गया है। आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, उत्तरदायित्वहीनता एवं अनुशासनहीनता बरते जाने के प्रथमदृष्टया आरोपों के चलते मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है।
निलंबन अवधि में राजेश्याम बट्टी का मुख्यालय कार्यालय उपसंचालक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, जिला शहडोल निर्धारित किया गया है। आदेश में उल्लेख है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
यह कार्रवाई कल्पना मिश्रा की मौत से जुड़े मामले में चल रही जांच के बीच सामने आई है। आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों, रीवा संभाग के आयुक्त, कलेक्टर रीवा तथा अन्य अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई और जानकारी के लिए भेजी गई हैं।
प्रशासन की ओर से जारी आदेश में निलंबन के आधार के रूप में जांच समिति की कार्रवाई के दौरान सामने आए कर्तव्य संबंधी आरोपों का उल्लेख किया गया है। मामले की जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही संबंधित घटनाक्रम की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर भोपाल के रीवा जिले में हुई कल्पना मिश्रा की प्रसव के दौरान मृत्यु के मामले में औषधि निरीक्षक राजेश्याम बट्टी को निलंबित करने के बारे में है। यह विषय मातृत्व सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निगरानी तंत्र पर प्रकाश डालता है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सरकार गंभीर चिकित्सा दुर्घटनाओं के जवाब में तुरंत कार्रवाई कर रही है, जिससे जनता का स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास बढ़ता है। इस कदम से आम जनता को यह आश्वासन मिलता है कि चिकित्सकीय त्रुटियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा, और